यूक्रेन में मानवता की हत्या, इंटरनेशनल कोर्ट ने कहा- पुतिन ने रेप और दहशत को बनाया हथियार
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि रूस ने जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाया। बच्चों का अपहरण, टॉर्चर और यौन हिंसा को अपनाया गया।

यूरोप की शीर्ष मानवाधिकार अदालत ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसले में रूस को यूक्रेन युद्ध के दौरान सुनियोजित युद्ध अपराधों, खासकर बलात्कार को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। तीन साल से चल रही यह भीषण जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। लाखों की मौत, करोड़ों लोगों के पलायन और अरबों की संपदा के खाक होने के बावजूद युद्ध जारी है। अब तक इस महायुद्ध को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनियाभर के नेता कई कोशिशें कर चुके हैं।
बुधवार को यूरोपीय कोर्ट ने कहा कि रूस की सेना ने यूक्रेन में न केवल नागरिकों पर जानलेवा हमले किए, बल्कि यौन हिंसा को एक रणनीति की तरह इस्तेमाल किया — जिसका मकसद लोगों को मानसिक रूप से तोड़ना और विरोध की भावना को कुचलना था।
रेप को बनाया हथियार
ECHR के अध्यक्ष मैटियास गयूमार ने अदालत में कहा,“युद्ध के दौरान रूस ने बलात्कार जैसे जघन्य कृत्यों को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। यह न सिर्फ युद्ध अपराध है, बल्कि यातना का चरम रूप भी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यौन हिंसा का उपयोग किसी भी सैन्य आवश्यकता से जुड़ा नहीं था, बल्कि यूक्रेनी नागरिकों के मनोबल को तोड़ने की सोची-समझी रणनीति थी।
अदालत ने क्या कहा और रूस का जवाब
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि रूस ने जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाया। बच्चों का अपहरण, टॉर्चर और यौन हिंसा को अपनाया गया। MH17 विमान हादसे में भी रूस को दोषी ठहराया गया। युद्ध के नाम पर आम लोगों को दहशत में रखने की नीति अपनाई गई। हालांकि, फैसले के बाद रूस ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, “हम इस फैसले को नहीं मानते। हमारे लिए यह कोई वैध निर्णय नहीं है।”
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