First time after 3.5 Decade France will increase nuclear warheads amid global uncertainty president Macron announces ईरान जंग के बीच फ्रांस का बड़ा फैसला, 3.5 दशक बाद पहली बार परमाणु जखीरा बढ़ाने का ऐलान; क्यों?, International Hindi News - Hindustan
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ईरान जंग के बीच फ्रांस का बड़ा फैसला, 3.5 दशक बाद पहली बार परमाणु जखीरा बढ़ाने का ऐलान; क्यों?

मैक्रों ने कहा कि यह फैसला यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लिया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और अमेरिका की सुरक्षा गारंटी को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

Mon, 2 March 2026 09:49 PMPramod Praveen एपी, पेरिस
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ईरान जंग के बीच फ्रांस का बड़ा फैसला, 3.5 दशक बाद पहली बार परमाणु जखीरा बढ़ाने का ऐलान; क्यों?

मध्य-पूर्व में चल रही जंग, दुनिया भर में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चिंताओं के बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को घोषणा की कि फ्रांस अपने परमाणु हथियारों की संख्या में वृद्धि करेगा, जो पिछले कई दशकों में पहली बार होगा। हालांकि, उन्होंने इसकी कोई निश्चित संख्या नहीं बताई। वर्तमान में फ्रांस के पास परमाणु अस्त्रों की संख्या 300 से कम बताई जाती है। संभवत: वर्ष 1992 के बाद यह पहली बार होगा जब फ्रांस अपने परमाणु जखीरों में वृद्धि करेगा। मैक्रों ने उत्तर-पश्चिमी फ्रांस के ले लोंग स्थित सैन्य प्रतिष्ठान में कहा, ''मैंने अपने शस्त्रागार में युद्धक हथियारों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है।''

फ्रांसीसी राष्ट्रपति का भाषण यह स्पष्ट करने के उद्देश्य से था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बार-बार होने वाले तनाव के कारण महाद्वीप में उठाई गई चिंताओं के बीच फ्रांसीसी परमाणु हथियार यूरोप की सुरक्षा में किस प्रकार उपयुक्त बैठते हैं। मैक्रों ने यह घोषणा फ्रांस के उत्तर-पश्चिम में स्थित ल’इल लॉन्ग सैन्य अड्डा से की, जो देश की बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने बताया कि फिलहाल फ्रांस के पास 300 से कम परमाणु वारहेड्स हैं, लेकिन अब इस संख्या को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितनी वृद्धि की जाएगी।

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यूरोप की सुरक्षा पर फोकस

मैक्रों ने कहा कि यह फैसला यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लिया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और अमेरिका की सुरक्षा गारंटी को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। इस स्थिति में फ्रांस अपने परमाणु प्रतिरोध (nuclear deterrence) की भूमिका को और स्पष्ट तथा मजबूत करना चाहता है।

सहयोग और नई सैन्य रणनीति

फ्रांस ने यह भी घोषणा की है कि वह अपने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम विमानों को अस्थायी रूप से सहयोगी देशों में तैनात कर सकता है। इसके अलावा, फ्रांस अब जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम के साथ मिलकर लंबी दूरी की मिसाइल परियोजनाओं पर काम करेगा। यह कदम यूरोपीय देशों के बीच रक्षा सहयोग को और गहरा करेगा। मैक्रों का यह फैसला ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और सैन्य तनाव बढ़ रहे हैं। ऐसे में परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाना एक ओर जहां सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर यह वैश्विक हथियार होड़ की चिंता भी बढ़ा सकता है।

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यह कदम केवल एक सैन्य निर्णय नहीं

फ्रांस का यह कदम केवल एक सैन्य निर्णय नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत भी है। यह दर्शाता है कि आने वाले समय में यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए अधिक आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा कि इस बढ़ते सैन्य संतुलन के बीच कूटनीति और शांति के प्रयास भी समान रूप से जारी रहें।

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