First Oil supply Crisis now Iran war threatens Food Crisis due to fertilizer supplies critical to food production पहले ईंधन की मार, अब दाने-दाने पर आफत; ईरान जंग से दुनियाभर में क्यों खाद्य संकट के आसार, International Hindi News - Hindustan
More

पहले ईंधन की मार, अब दाने-दाने पर आफत; ईरान जंग से दुनियाभर में क्यों खाद्य संकट के आसार

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो आने वाले महीनों में फर्टिलाइजर की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है, जिससे दुनिया के कई देशों में कृषि लागत बढ़ेगी और अंततः खाद्यान्न महंगे हो सकते हैं।

Mon, 9 March 2026 10:54 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
पहले ईंधन की मार, अब दाने-दाने पर आफत; ईरान जंग से दुनियाभर में क्यों खाद्य संकट के आसार

मिडिल-ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में युद्ध की स्थिति अगर लंबी चली तो दुनिया भर में फर्टिलाइजर (खाद) की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्यान्न कीमतों पर व्यापक असर पड़ सकता है और अगर ऐसा हुआ तो दुनिया की एक बड़ी आबादी दाने-दाने को मोहताज हो सकती है।

विश्लेषकों के अनुसार मध्य-पूर्व क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े फर्टिलाइजर संयंत्रों और उनके कच्चे माल का प्रमुख केंद्र है। वैश्विक व्यापार का लगभग 25 से 35 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से गुजरता है। यह संकरा समुद्री मार्ग एक ओर ईरान से घिरा हुआ है और मौजूदा युद्ध की स्थिति में जहाजों के लिए लगभग बंद हो गया है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में फर्टिलाइजर से जुड़े कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हो रही है। ईरान खुद भी यूरिया का एक बड़ा निर्यातक देश है। ऐसे में दुनिया भर में खाद आपूर्ति में बड़ा संकट पैदा हो चुका है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:ईरान के खिलाफ युद्ध में हर दिन US का इतना खर्च, रकम जान फटी रह जाएंगी आंखें

यूरिया निर्यात में चौथे स्थान पर ईरान

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर यूरिया निर्यात में रूस, मिस्र और सऊदी अरब के बाद ईरान चौथे स्थान पर है। चूंकि सऊदी अरब का निर्यात भी उसी समुद्री मार्ग पर निर्भर है, इसलिए उस पर भी इस संकट का प्रभाव पड़ रहा है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से मिस्र में यूरिया की कीमतों में एक-तिहाई से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। इसके अलावा फर्टिलाइजर निर्माण में उपयोग होने वाले सल्फर की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:ईरान जंग में NATO की एंट्री? तुर्की की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल समंदर में गिराई
ये भी पढ़ें:नए खामेनेई आए तो और भड़की जंग, तेल के दाम में भी उछाल; मोजतबा के क्या मायने?

आधे सल्फर निर्यात मध्य-पूर्व के देशों से

विशेषज्ञ बताते हैं कि दुनिया के लगभग आधे सल्फर निर्यात मध्य-पूर्व के देशों से आते हैं, इसलिए वहां की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है। ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों ने भी स्थिति को जटिल बना दिया है। क्षेत्र में गैस उत्पादन प्रभावित होने लगा है, जबकि प्राकृतिक गैस फर्टिलाइजर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इस कारण कई उत्पादकों को उत्पादन घटाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।ईरान

विकासशील देशों के लिए गंभीर चुनौती

नॉर्वे की प्रमुख रासायनिक कंपनी Yara International के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Svein Tore Holsether ने चेतावनी दी है कि “हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक खाद्य उत्पादन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। फर्टिलाइज़र कोई साधारण वस्तु नहीं है, क्योंकि दुनिया के लगभग आधे खाद्य उत्पादन का आधार यही है।” विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो आने वाले महीनों में फर्टिलाइज़र की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है, जिससे दुनिया के कई देशों में कृषि लागत बढ़ेगी और अंततः खाद्यान्न महंगे हो सकते हैं। यह स्थिति विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।