टैरिफ युद्ध में फंस गए ट्रंप, इससे US ने जो कमाया लौटाना होगा? अधिकारियों ने क्या बताया
Donald Trump Tariff Update: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए टैरिफ परेशानी का सबब बनता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ फैसले को अवैध घोषित करने के बाद अब इसके जरिए हुई कमाई पर सवाल बना हुआ है। इस कमाई को वापस किए जाने को लेकर कोर्ट के आदेश का इंतजार किया जा रहा है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ हथियार अब उनके ऊपर ही भारी पड़ता नजर आ रहा है। पिछले एक साल में ट्रंप ने लगभग दुनिया के हर देश को टैरिफ की धमकी दी थी। लेकिन अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन टैरिफ को अवैध ठहराए जाने के बाद यह ट्रंप के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सवाल यह है कि क्या इन टैरिफ्स से अमेरिका ने जो भी पैसा कमाया है, वह आयातकों को लौटाना होगा? इस सवाल का जवाब सुप्रीम कोर्ट के फैसले में नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक रिफंड दिया जाएगा या नहीं... और यह किस प्रक्रिया के तहत दिया जाएगा, यह निचली अदालतें तय करेंगी।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन गियर ने कहा कि न्यायालय जो भी निर्देश देगा प्रशासन उसका पालन करेगा। उन्होंने कहा, “यह अदालतों का मामला है। स्थिति उन्होंने बनाई है और वो जो भी कहेंगे, हम उसका पालन करेंगे।” इसके अलावा ट्रंप के करीबी स्कॉट बेसेंट ने भी ट्रंप प्रशासन का यही रुख दोहराया। उन्होंने कहाकि सरकार अदालत के निर्देशों का इंतजार कर रही है और रिफंड पर फैसला आने में अभी हफ्तों या महीनों का समय लग सकता है।
अरबों डॉलर दांव पर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल सत्ता में आने के बाद ही टैरिफ युद्ध शुरू कर दिया था। क्या विरोधी क्या समर्थक सभी देशों के ऊपर टैरिफ थोप दिए गए। कुछ ही महीनों में अमेरिका ने इन टैरिफों से करीब 130 अरब डॉलर की कमाई की। अब जबकि अदालत ने इन टैरिफों को अवैध घोषित कर दिया है, तो यह पैसा अधर में लटक गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने यह पैसा लौटाने के लिए नहीं कहा है, अगर वह कहता है तो प्रशासन को आयातकों को यह पैसा लौटाना होगा।
अमेरिकियों ने ही उठाया है ट्रंप के टैरिफ युद्ध का खर्च
अमेरिका द्वारा किसी भी देश से आने वाले सामान पर जब टैरिफ लगाया गया, तो इसका सीधा मतलब था कि यह पैसा अमेरिकी आयातकों को ही चुकाना होगा। कई कंपनियों ने इसके लिए अरबों डॉलर का भुगतान भी किया। कॉस्टकों जैसी बड़ी आयातक कंपनियों ने अपने सभी संभावित दावों को सुरक्षित रखने के लिए पहले ही मुकदमें दायर कर दिए थे। न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व के एक अध्ययन में पाया गया कि लगभग 90 फीसदी टैरिफ का बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं और आयातकों ने ही उठाया है। यह आंकड़े ट्रंप के उन दावों के विरोधी हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि विदेशियों ने टैरिफ दिया है।
गौरतलब है कि ट्रंप शुरुआत से ही यह दावा करते हुए आ रहे हैं, कि उनके टैरिफ फैसले की वजह से अमेरिका ने कई अरब डॉलर कमाएं हैं। यह सच भी है, लेकिन अगर आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो यह पूरा भार अमेरिकी जनता पर ही पड़ा है। इसके अलावा अब जबकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ फैसले को अवैध कर दिया है। तो ट्रंप टैरिफ को लेकर किया गया काम शून्य कि स्थिति में पहुंच गया है। अब अगर सुप्रीम कोर्ट पैसे वापस करने का आदेश देता है, तो ट्रंप प्रशासन को ऐसा ही करना होगा। यह उनकी लोकप्रियता के लिए एक धक्का साबित हो सकता है।
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