मध्यस्थ बना घूम रहा था पाकिस्तान, डोनाल्ड ट्रंप के अब्राहम अकॉर्ड्स वाले दांव में कैसे फंस गया
डोनाल्ड ट्रंप की यह पहल पाकिस्तान के लिए गंभीर कूटनीतिक चुनौती बनती दिखाई दे रही है। पाकिस्तान दशकों से फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल को मान्यता न देने की नीति पर कायम है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर मध्य-पूर्व की राजनीति में बड़ा दांव चला है। उन्होंने कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की अपील की है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ संभावित समझौते के तहत पाकिस्तान, कतर, मिस्र, जॉर्डन और तुर्किये जैसे देशों को सामूहिक रूप से इन समझौतों पर हस्ताक्षर करना चाहिए। अब्राहम अकॉर्ड्स 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में शुरू हुआ था, जिसके तहत इजरायल और कुछ अरब देशों के बीच संबंध सामान्य किए गए थे।
डोनाल्ड ट्रंप की यह पहल पाकिस्तान के लिए गंभीर कूटनीतिक चुनौती बनती दिखाई दे रही है। पाकिस्तान दशकों से फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल को मान्यता न देने की नीति पर कायम है। देश के भीतर धार्मिक संगठनों, विपक्षी दलों और आम जनता का बड़ा वर्ग इजरायल के साथ रिश्तों का विरोध करता है। ऐसे में अगर पाकिस्तान अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ता है तो सरकार और सेना दोनों को घरेलू राजनीतिक विरोध और जनाक्रोश का सामना करना पड़ सकता है।
पाकिस्तान के लिए पेचीदा मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की स्थिति इसलिए भी पेचीदा है क्योंकि उसे एक ओर अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखने हैं, वहीं दूसरी ओर फिलिस्तीन मुद्दे पर अपनी पारंपरिक नीति से पीछे हटना भी आसान नहीं है। हाल के महीनों में पाकिस्तान ने ईरान-अमेरिका वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की है। ऐसे समय में ट्रंप की ओर से अब्राहम अकॉर्ड्स को ईरान समझौते से जोड़ना इस्लामाबाद पर अतिरिक्त दबाव पैदा कर रहा है।
सोशल मीडिया और पाकिस्तान के ऑनलाइन मंचों पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों ने इसे पाकिस्तान की विदेश नीति के लिए रेड लाइन बताया है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अगर पाकिस्तान अमेरिकी दबाव में इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में बढ़ता है तो इससे घरेलू अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इससे पाकिस्तान को आर्थिक और कूटनीतिक फायदे भी मिल सकते हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
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