ईरान युद्ध के बीच अमेरिका-चीन आमने-सामने, ड्रैगन ने क्यों कहा- देंगे करारा जवाब?
चीन ने मंगलवार को अमेरिका को साफ चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को हथियार सप्लाई करने के 'मनगढ़ंत' आरोपों के आधार पर चीनी सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की अपनी धमकी को अमल में लाते हैं, तो बीजिंग भी जवाबी कार्रवाई करेगा।

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच चीन और अमेरिका आमने-सामने आ गए हैं। चीन ने मंगलवार को अमेरिका को साफ चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को हथियार सप्लाई करने के 'मनगढ़ंत' आरोपों के आधार पर चीनी सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की अपनी धमकी को अमल में लाते हैं, तो बीजिंग भी जवाबी कार्रवाई करेगा। इसका मतलब साफ है कि अगर अमेरिका की ओर से किसी तरह की कार्रवाई की जाती है तो चीन भी पलटवार करेगा और करारा जवाब देगा।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ये रिपोर्टें पूरी तरह से मनगढ़ंत और बेबुनियाद हैं। अमेरिका अगर इन्हें बहाने के रूप में इस्तेमाल करके चीन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने पर अड़ा रहा, तो चीन निश्चित रूप से अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई करेगा। गुओ जियाकुन ने उन सभी रिपोर्टों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चीन सैन्य निर्यात के मामले में हमेशा सतर्क और जिम्मेदार रवैया अपनाता है तथा अपने निर्यात नियंत्रण कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का सख्ती से पालन करता है। उन्होंने 'बेबुनियाद बदनामी' और 'दुर्भावनापूर्ण जोड़-तोड़' का विरोध भी किया।
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में चेतावनी दी थी कि अगर चीन ईरान को सैन्य सहायता, खासकर कंधे से दागे जाने वाले एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल (MANPADS) मुहैया कराता है, तो चीन के सामान पर 50 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगा दिया जाएगा। ट्रंप की यह टिप्पणी उसी दिन आई जब सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से खबर दी कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि चीन अगले कुछ हफ्तों में ईरान को नई हवाई रक्षा प्रणाली देने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा, न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि बीजिंग पहले ही कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलों की एक खेप भेज चुका है।
गौरतलब है कि चीन ईरान का प्रमुख आर्थिक साझेदार है और तेहरान के अधिकांश तेल का खरीदार है। हालांकि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक सैन्य समझौता नहीं है। वहीं कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीजिंग इन संबंधों को मुख्य रूप से व्यापारिक और लेन-देन के आधार पर देखता है। इतना ही नहीं, चीन खाड़ी देशों के साथ भी मजबूत आर्थिक संबंध रखता है और उसने ईरान द्वारा इन देशों पर युद्धकाल में किए गए हमलों की आलोचना भी की है।
बता दें कि ट्रंप अगले महीने अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ वार्ता के लिए बीजिंग जाने वाले हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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