China fourth aircraft carrier major transformation aircraft carrier nuclear power परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत बना रहा चीन, क्यों दुनिया की टिकीं नजरें, International Hindi News - Hindustan
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परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत बना रहा चीन, क्यों दुनिया की टिकीं नजरें

चीन पहले ही तीन विमानवाहक पोत को विकसित कर चुका है, जो पारंपरिक ईंधन पर चलते हैं। लेकिन नया कैरियर तकनीकी रूप से अधिक डेवलप होगा। परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जहाज लंबे समय तक बिना ईंधन भरे समुद्र में रह सकते हैं।

Sat, 25 April 2026 11:28 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत बना रहा चीन, क्यों दुनिया की टिकीं नजरें

चीन ने अपने चौथे एयरक्राफ्ट कैरियर को लेकर बड़ा संकेत दिया है, जो उसकी नौसैनिक ताकत में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग अपने नए विमानवाहक पोत को परमाणु ऊर्जा से ऑपरेट करने की तैयारी में है। अगर ऐसा होता है तो यह चीन का पहला न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर होगा और उसकी ब्लू-वॉटर नेवी बनने की इच्छा को नई मजबूती देगा। इस संभावित कैरियर को टाइप-004 कैटेगरी का माना जा रहा है।

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चीन पहले ही तीन विमानवाहक पोत (लियाओनिंग, शानडोंग और फुजियान) को विकसित कर चुका है, जो पारंपरिक ईंधन पर चलते हैं। लेकिन नया कैरियर तकनीकी रूप से अधिक डेवलप होगा। परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जहाज लंबे समय तक बिना ईंधन भरे समुद्र में रह सकते हैं और उनकी ऑपरेशनल क्षमता भी ज्यादा होती है। इस कदम को चीन की वैश्विक समुद्री रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ब्लू-वॉटर नेवी का मतलब है ऐसी नौसेना जो अपने तटीय क्षेत्रों से दूर खुले महासागरों में लंबे समय तक सैन्य संचालन कर सके।

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बीजिंग को मिलेंगे किस तरह के फायदे

चीन पिछले कुछ वर्षों से अपनी नौसेना का तेजी से विस्तार कर रहा है, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ा सके और वैश्विक स्तर पर शक्ति संतुलन में अहम भूमिका निभा सके। एक न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर चीन को रणनीतिक रूप से कई फायदे देगा। यह ज्यादा गति, लंबी दूरी और भारी हथियारों के साथ ऑपरेशन करने में सक्षम होगा। इसके जरिए चीन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सहित दुनिया के अन्य समुद्री क्षेत्रों में अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर सकेगा।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यह विकास अमेरिका जैसी बड़ी नौसैनिक ताकतों को चुनौती देने की दिशा में अहम कदम हो सकता है। हालांकि, इस कदम से क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले से ही समुद्री तनाव मौजूद है, खासकर दक्षिण चीन सागर और ताइवान के आसपास। ऐसे में चीन का यह नया कैरियर शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है और अन्य देशों को भी अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

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