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अमेरिका की नाकाबंदी के बीच होर्मुज से निकला पाकिस्तानी टैंकर, आधा ही भरा; दुनिया हैरान!

अमेरिकी नाकाबंदी और खौफ के बीच 14 जहाजों के यू-टर्न लेने के बावजूद, पाकिस्तानी तेल टैंकर 'शालिमार' ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है। जानिए अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इस दुस्साहसिक यात्रा की पूरी कहानी।

Fri, 17 April 2026 01:54 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, इस्लामाबाद
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अमेरिका की नाकाबंदी के बीच होर्मुज से निकला पाकिस्तानी टैंकर, आधा ही भरा; दुनिया हैरान!

सोमवार को शुरू हुई अमेरिकी नाकाबंदी के बाद, पाकिस्तान के झंडे वाला एक तेल टैंकर फारस की खाड़ी से कच्चे तेल का माल लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर निकलने वाला पहला जहाज बन गया है। यह घटना इस बात को दर्शाती है कि दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण और संकरे व्यापारिक जलमार्ग पर यातायात इस समय कितना सीमित और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

जहाज और उसके माल का विवरण

जहाज का नाम 'शालिमार' बताया गया है और यह एक अफ्रामैक्स श्रेणी का टैंकर है। जहाज ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के 'दास द्वीप' से कच्चा तेल लोड किया। गुरुवार देर रात यह ईरान के लारख द्वीप के दक्षिण से होते हुए ओमान की खाड़ी में निकल गया और इसकी मंजिल पाकिस्तान का कराची बंदरगाह है। यह टैंकर अभी आधा ही भरा हुआ है और इसमें लगभग 4,50,000 बैरल कच्चा तेल मौजूद है। वर्तमान में यह ओमान की खाड़ी से होते हुए अरब सागर की ओर बढ़ रहा है।

'शालिमार' का सफर असामान्य क्यों है?

पिछले सात हफ्तों में होर्मुज को पार करने वाले जहाजों की संख्या न के बराबर रही है। पिछले हफ्ते गैर-ईरानी तेल वाले तीन सुपरटैंकर जरूर निकले थे। हालांकि ईरान ने कुछ पाकिस्तानी जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है, फिर भी 'शालिमार' का महज कुछ दिनों में सफलतापूर्वक खाड़ी से बाहर आ जाना एक दुर्लभ घटना है।

रविवार को शालिमार ने होर्मुज पार करके फारस की खाड़ी में जाने की कोशिश की, लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता विफल होने के कारण उसने यू-टर्न ले लिया। इसने फिर से प्रयास किया, जलमार्ग पार किया और यूएई के दास द्वीप पहुंचा। सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित नाकाबंदी लागू हो गई, जिससे जहाजों के लिए खतरा और बढ़ गया। गुरुवार को अपना माल लादकर जहाज सफलतापूर्वक ओमान की खाड़ी की ओर निकल गया।

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ईरान के तेल निर्यात पर असर

अमेरिका के इस ताजा कदम से पहले, ईरान का अपना बेड़ा लगातार काम कर रहा था। मार्च के महीने में ईरान ने लगभग 17 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का निर्यात किया था। लेकिन अब चूंकि दोनों पक्ष बातचीत के नए दौर पर विचार कर रहे हैं, इसलिए यह निर्यात काफी हद तक रुक गया है।

जहाज लौट रहे हैं

अमेरिकी नाकाबंदी के बाद से बहुत कम जहाजों ने फारस की खाड़ी छोड़ने की हिम्मत दिखाई है। 'यूएस सेंट्रल कमांड' ने गुरुवार को बताया कि महज तीन दिनों के भीतर 14 जहाजों ने डरकर यू-टर्न ले लिया।

शुक्रवार को गैर-ईरानी ठिकानों की ओर जाने वाले चार जहाज ट्रांजिट कर रहे हैं या उसके करीब हैं। इसके अलावा ईरान से आए दो मालवाहक जहाज ओमान की खाड़ी में जाते देखे गए।

समुद्री डेटाबेस 'इक्वासिस' के मुताबिक, शालिमार जहाज का स्वामित्व और प्रबंधन पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉर्प (PNSC) के पास है। फिलहाल कंपनी की तरफ से इस यात्रा पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

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नाकाबंदी और तनाव का प्रभाव

फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए हमलों के बाद से इस संकरे जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सिंगल डिजिट में सिमट गई है। सप्ताहांत में इसमें थोड़ी वृद्धि हुई थी, लेकिन अब यह वापस न्यूनतम स्तर पर आ गई है।

अमेरिकी नौसेना की नई नाकाबंदी के कारण अब जहाज मालिकों को फारस की खाड़ी से दुनिया के अन्य हिस्सों में तेल और सामान ले जाने के लिए ईरानी और अमेरिकी, दोनों अधिकारियों से मंजूरी लेनी पड़ रही है।

अमेरिकी नौसेना द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो मैप के अनुसार, यह नाकाबंदी ओमान के रास अल हद्द तट से लेकर उत्तर-पूर्व में ईरान-पाकिस्तान सीमा तक फैली हुई है।

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