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ताइवान पर जिनपिंग ने दे डाली ट्रंप को अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी, सही से नहीं संभाला गया तो...

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ताइवान मुद्दे को लेकर सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि इस संवेदनशील मुद्दे को सही तरीके से संभाला नहीं गया तो चीन और अमेरिका के बीच टकराव और संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है।

Thu, 14 May 2026 07:46 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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ताइवान पर जिनपिंग ने दे डाली ट्रंप को अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी, सही से नहीं संभाला गया तो...

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ताइवान मुद्दे को लेकर सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि इस संवेदनशील मुद्दे को सही तरीके से संभाला नहीं गया तो चीन और अमेरिका के बीच टकराव और संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। जिनपिंग ने गुरुवार को बीजिंग में ट्रंप के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद कहा कि ताइवान चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्थिति को ठीक से संभाला गया तो द्विपक्षीय संबंध स्थिर रहेंगे, अन्यथा दोनों देशों को टकराव और यहां तक कि संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि ताइवान स्ट्रेट में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के बीच स्थिर संबंधों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने 'ताइवान की स्वतंत्रता' की किसी भी कोशिश का विरोध करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाइयां क्षेत्रीय शांति के अनुकूल नहीं हैं। चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है और उसे विद्रोही प्रांत के रूप में देखता है। बैठक के बाद शी जिनपिंग ने कहा कि उन्होंने ट्रंप के साथ 'रचनात्मक चीन-अमेरिका संबंधों' और रणनीतिक स्थिरता के नए दृष्टिकोण पर सहमति जताई है। यह नया दृष्टिकोण अगले तीन वर्षों और उससे आगे द्विपक्षीय संबंधों के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा। उन्होंने जोर दिया कि यह ढांचा सहयोग, प्रबंधनीय प्रतिस्पर्धा और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित होना चाहिए तथा इसे ठोस कार्रवाइयों से लागू किया जाना चाहिए।

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यहां बताना जरूरी है कि 1979 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद अमेरिका ताइवान को अनौपचारिक रूप से समर्थन देता रहा है और हथियार भी उपलब्ध कराता है, लेकिन औपचारिक रूप से बीजिंग की 'एक चीन' नीति को स्वीकार करता है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है। शायद यही कारण है कि शी जिनपिंग ने अमेरिका को सीधा संदेश दे दिया कि ताइवान को लेकर चीन क्या सोचता और अमेरिका से क्या चाहता है।

व्यापार और सहयोग पर सकारात्मक नजरिया

इस दौरान शी जिनपिंग ने दोनों देशों की आर्थिक टीमों द्वारा किए गए प्रयासों को संतुलित और सकारात्मक बताते हुए कहा कि चीन अपने बाजार को और अधिक खोलेगा। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों का स्वागत किया और कहा कि दोनों पक्षों को राजनीतिक, राजनयिक तथा सैन्य क्षेत्रों में संवाद चैनलों को मजबूत करना चाहिए। स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन और लोगों के बीच संबंधों जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

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बता दें कि ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार चीन यात्रा पर आए हैं है। उनके साथ अमेरिका के प्रमुख कारोबारी नेता भी बीजिंग पहुंचे, जिनमें एनवीडिया के जेन्सन हुआंग, एप्पल के टिम कुक, टेस्ला के एलन मस्क और ब्लैक रॉक के लैरी फिंक शामिल हैं। ट्रंप ने इस शिखर वार्ता को अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन करार दिया। दोनों नेताओं ने ईरान, व्यापार तनाव, टैरिफ, प्रौद्योगिकी और ताइवान जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए और व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता।

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