खामेनेई की मौत से ईरानी सेना बिखरी, चेन ऑफ कमांड टूटी; जल्द नए सुप्रीम लीडर की मांग
ऐसे में IRGC कानूनी प्रक्रिया के बाहर नए नेता की नियुक्ति पर जोर दे रहा है। कहा यह भी जा रहा है कि खामेनेई की मौत के बाद इस्लामिक गणतंत्र की सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य व्यवस्था में कंफ्यूजन खड़ा हो गया है।
सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरानी मीडिया ने भी कर दी है। अब खबर है कि नए नेता के चुनाव को लेकर IRGC यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने दबाव बनाना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि IRGC बगैर किसी कानूनी प्रक्रिया के नए लीडर को तख्त पर बैठाना चाहता है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। खामेनेई की मौत के साथ ही 47 साल के शासन का अंत हो गया है।
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया है कि IRGC इस्लामिल गणतंत्र के नए नेता का चुनाव जल्द से जल्द कराना चाहता है। सूत्रों की मानें तो IRGC का बचा हुआ कमांड स्ट्रक्चर रविवार सुबह 1 मार्च तक ही इस फैसले पर अंतिम मुहर चाहता है। सूत्रों ने कहा कि जारी एयर स्ट्राइक्स के बीच एसेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स (संवैधानिक संस्था, जो सुप्रीम लीडर का चुनाव करती है) का सत्र आयोजित करना मुमकिन नहीं होगा।
ऐसे में IRGC कानूनी प्रक्रिया के बाहर नए नेता की नियुक्ति पर जोर दे रहा है। कहा यह भी जा रहा है कि खामेनेई की मौत के बाद इस्लामिक गणतंत्र की सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य व्यवस्था में कंफ्यूजन खड़ा हो गया है। सूत्रों का कहना है कि ईरान की चेन ऑफ कमांड के कुछ हिस्से पूरी तरह तितर बितर हो गए हैं, जिससे आदेश देने और सैन्य तालमेल बिठाने में भारी मुश्किलें आ रही हैं। इससे आने वाले घंटों और दिनों में जमीनी स्तर पर फैसले लेने और संकट प्रबंधन की स्थिति और भी जटिल हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, जानकारियां मिल रही हैं कि कुछ सैन्य कमांडर्स और निचली रैंक के कर्मी अपने बेस और मिलिट्री सेंटर्स पर रिपोर्ट नहीं कर रहे हैं। IRGC को कथित तौर पर इस बात की भी चिंता है कि रविवार सुबह होते ही देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग सड़कों पर उतर आएंगे और प्रदर्शनों का नया दौर शुरू हो सकता है।
क्या बोला अमेरिका
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ईरान पर किए गए हमलों की वजह और उससे पहले हुई बातचीत की विफलता की जानकारी दी है। अधिकारी ने कहा कि ईरानी पक्ष की ओर से किसी समझौते तक पहुंचने के लिए कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। अमेरिका ने ईरान को हमेशा के लिए मुफ्त परमाणु ईंधन देने की पेशकश की थी। इसके बावजूद ईरान खुद यूरेनियम संवर्धन करने की क्षमता रखने पर अड़ा रहा, जिसे अमेरिका परमाणु हथियार बनाने की कोशिश मानता है। इसके अलावा ईरान ने तेहरान द्वारा समर्थित उग्रवादी समूहों के मुद्दे पर बातचीत से इनकार कर दिया। ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों पर बात करने से भी मना कर दिया था।
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