Amid Strait of Hormuz crisis Russian oil imports to India hits 3 year high होर्मुज संकट के बीच रूस फिर साबित हुआ भारत का सबसे भरोसेमंद साथी, तेल आयात 3 साल के टॉप पर, International Hindi News - Hindustan
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होर्मुज संकट के बीच रूस फिर साबित हुआ भारत का सबसे भरोसेमंद साथी, तेल आयात 3 साल के टॉप पर

भारत अपनी तेल की जरूरतों का करीब 90 फीसदी हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में हालिया युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़े तनाव का असर भारत पर भी पड़ा है।

Tue, 14 April 2026 01:27 PMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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होर्मुज संकट के बीच रूस फिर साबित हुआ भारत का सबसे भरोसेमंद साथी, तेल आयात 3 साल के टॉप पर

पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग और उसकी वजह से उपजे ईंधन संकट के बाद रूस एक बार फिर भारत का सबसे भरोसेमंद साथी बन कर उभरा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी के बीच भारत ने पिछले दो महीनों में रूस से कच्चे तेल की खरीद तेज कर दी है। यही नहीं, रूस से तेल आयात के मामले में तीन साल का रिकॉर्ड भी टूट गया है।

डेटा एजेंसी केपलर के मुताबिक मार्च में भारत ने रूस से औसतन 19.8 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया, जो जून 2023 के बाद सबसे ज्यादा है। हालांकि अप्रैल में यह आंकड़ा घटकर 15.7 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया, लेकिन इसकी वजह नायरा एनर्जी की 4 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली रिफाइनरी का मेंटेनेंस के लिए बंद होना है। अधिकारियों का कहना है कि अगले महीने से आयात फिर बढ़ जाएगा।

जारी रहेगी खरीद

इससे पहले मार्च की शुरुआत में अमेरिका ने रूसी तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील दी थी। इस छूट के बाद भारत ने इस महीने करीब 6 करोड़ बैरल तेल खरीदा और आगे भी ऐसी ही संभावनाएं हैं। बड़े रिफाइनरी अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा स्तर पर यह खरीद पूरे साल जारी रह सकती है। उनका मानना है कि अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट को जल्द ही बढ़ाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि बिना किसी छूट के भी खरीद में ज्यादा कमी आने की संभावना नहीं है, क्योंकि विकल्प सीमित हैं।

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भारत ने बता दी है अपनी स्थिति

इससे पहले भारत ने कई मौकों पर यह स्पष्ट किया है कि भारत अपनी तेल जरूर को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। बीते सीनों तेल मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने कहा है कि भारत की प्राथमिकता घरेलू मांग को पूरा करने के लिए जरूरी ऊर्जा को जुटाना है। उन्होंने बताया कि कच्चा तेल खरीदने का फैसला तकनीकी और व्यापारिक आधार पर लिया जाता है, यानी जो तेल रिफाइनरी के लिए उपयुक्त और सस्ता होगा, वही खरीदा जाएगा।

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बदल गए हालात

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत इस समय जितना संभव हो उतना रूसी तेल खरीद रहा है। सिंगापुर की कंसल्टेंसी वांडा इनसाइट्स की वंदना हरी का कहना है कि जब तक पर्शियन गल्फ से सप्लाई सीमित रहेगी, भारत रूस से अधिकतम तेल लेने की कोशिश करता रहेगा। बता दें कि यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा समुद्री खरीदार बन गया था। हालांकि पिछले साल अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण स्थिति बदली थी। अब ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद हालात फिर बदल गए हैं और भारत ने रूस से तेल की खरीद बढ़ाई है।

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एलपीजी संकट भी दूर करेगा रूस?

बता दें कि भारत अपनी जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत तेल आयात करता है। तेल और एलपीजी जैसे अहम ईंधन की सप्लाई के लिए भारत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर है और इसीलिए युद्ध का असर भारत कर भी पड़ा है। ऐसे में रूस ने एशियाई देशों को सस्ते एलएनजी का भी ऑफर दिया है। जानकारी के मुताबिक रूस ने भारत जैसे देशों को एलएनजी की खरीद पर 40 फीसदी का डिस्काउंट दिया है।

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