ईंधन संकट के बीच भारत की मदद के लिए आगे आया पुराना दोस्त, पीएम मोदी से मिलकर दिया बड़ा भरोसा
दो दिन की भारत यात्रा पर आए मांतुरोव ने पीएम मोदी के साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से भी मुलाकात की है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच उनकी इस यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से पूरी दुनिया पर छाए ईंधन संकट के बीच भारत की मदद के लिए पुराना दोस्त, रूस आगे आया है। गुरुवार को रूस ने भारत को ज्यादा तेल और नैचुरल गैस सप्लाई करने का प्रस्ताव दिया है। रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव ने खुद भारत आकर मदद का भरोसा दिलाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की है और ऊर्जा और उर्वरक जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर बातचीत की है।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की जानकारी भी साझा की। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि रूसी उप प्रधानमंत्री के साथ व्यापार, उर्वरक, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच आपसी सहयोग जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने पिछले दिसंबर में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हुए भारत-रूस शिखर सम्मेलन के नतीजों को लागू करने के लिए दोनों देशों के लगातार प्रयासों की भी सराहना की। वहीं मांतुरोव और विदेश मंत्री जयशंकर ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष सहित क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी चर्चा की।
भारत की जरूरतों को पूरा करने को रूस तैयार
इन मुलाकातों के बाद रूसी दूतावास ने एक बयान में कहा कि मांतुरोव ने पुष्टि की है कि रूसी कंपनियों के पास भारतीय बाजार को तेल और लिक्विफाइड नैचुरल गैस की सप्लाई लगातार बढ़ाने की क्षमता है। मांतुरोव ने कहा कि रूस ने 2025 के अंत तक भारत को उच्च मांग वाले खनिज उर्वरकों की सप्लाई में 40% की बढ़ोतरी की है और रूस भारत की जरूरतों को पूरा करते रहने के लिए तैयार है। बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष कार्बाइड उत्पादन के लिए एक संयुक्त परियोजना भी विकसित कर रहे हैं।
होर्मुज बंद होने से बढ़ा संकट
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका इजरायल के बीच बीते एक महीने से ज्यादा समय से युद्ध जारी है, जिसके बाद भारत समेत कई देशों में ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं। इसकी बड़ी वजह है युद्ध के बीच दुनिया के प्रमुख जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का प्रभावी रूप से बंद होना। इस समुद्री रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार होता है, जो बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस मार्ग पर ही निर्भर है, खासकर भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है।
क्या कर रहा है भारत?
युद्ध शुरू होने के बाद भारत आने वाले कई जहाज इस रास्ते में फंसे हुए हैं, जिसके बाद भारत अपने ईंधन आपूर्ति के स्रोतों का विस्तार कर रहा है। भारत ने कहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा और हाल ही में भारत ने रूस, वेनेजुएला और कई अन्य देशों से तेल की खरीद में बढ़ोतरी की है। वहीं रूसी तेल पर अमेरिका द्वारा पूर्व में लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा है।
वहीं हाल ही में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में छूट दिए जाने के बाद रूस एक बार फिर ऊर्जा के सबसे बड़े सप्लायर के रूप में उभरा है। अब रूस के उप प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद जारी रूसी बयान में कहा गया है कि मांतुरोव की भारतीय नेताओं के साथ बातचीत के दौरान तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया।




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