खुद दो मोर्चों पर खस्ताहाल है पाकिस्तान, पर ईरान जंग में बनना चाह रहा ब्रिज बिल्डर; दोस्त से क्या कहा?
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सऊदी अरब की यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब इस क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है और एक बड़े युद्ध की आशंका गहरा रही है। दूसरी तरफ पाकिस्तान खुद दो मोर्चों पर जंग लड़ रहा है।

मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को जेद्दा पहुंचकर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ एक "सीमित बैठक" की और ईरान जंग के बीच सऊदी अरब को पाकिस्तान की तरफ से पूर्ण एकजुटता और समर्थन का भरोसा दिलाया। यह जानकारी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने दी है। पाक पीएम शरीफ की यह सऊदी अरब की यात्रा ऐसे समय में हुई जब इस क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। दूसरी तरफ पाकिस्तान खुद दो मोर्चों पर जंग लड़ रहा है। एक तरफ उसे अफगान सीमा पर तालिबान से लड़ना पड़ रहा है तो दूसरी तरफ बलूचिस्तान में बलोच विद्रोहियों से भी दो-दो हाथ करने पड़ रहे हैं।
उधर, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाब में तेहरान ने मिडिल-ईस्ट के कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों के साथ-साथ वाणिज्यिक और तेल बुनियादी ढांचों पर जवाबी हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंकाएँ बढ़ गई हैं। जेद्दा के अब्दुलअज़ीज़ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर प्रधानमंत्री शरीफ का स्वागत मक्का क्षेत्र के डिप्टी गवर्नर प्रिंस सऊद बिन मिशाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।
क्षेत्रीय शांति पर चर्चा
पाक PMO की तरफ से कहा गया है कि बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने मध्य-पूर्व की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत चर्चा की और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान में कहा गया, “पाकिस्तान हमेशा सऊदी अरब के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा और क्षेत्र में शांति की साझा इच्छा को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करता रहेगा।”
सऊदी अरब पर ड्रोन हमले
इसी बीच सऊदी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि देश के पूर्वी और मध्य क्षेत्रों को निशाना बनाकर भेजे गए कई ड्रोन को मार गिराया गया। इससे पहले दक्षिण-पूर्व में स्थित शायबह तेल क्षेत्र को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान-अमेरिका-इज़रायल संघर्ष के बाद खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिससे व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की आशंका भी बढ़ रही है।
“ब्रिज बिल्डर” की भूमिका में पाकिस्तान
इस संकट के बीच पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ या “ब्रिज बिल्डर” के रूप में पेश कर रहा है। इस्लामाबाद के विदेश मंत्रालय का कहना है कि वह क्षेत्र के कई देशों के साथ लगातार संपर्क में है और संवाद के रास्ते खुले रखने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से सैन्य और रणनीतिक साझेदारी रही है। पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते के बाद यह सहयोग और मजबूत हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार यदि मध्य-पूर्व में संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। इसलिए कई देश कूटनीतिक प्रयासों के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।
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