कौन हैं अनुराग शर्मा, जिनके लिए कांग्रेस ने कई दिग्गजों को किया दरकिनार; चौंकाने की वजह क्या
अनुराग शर्मा को कांग्रेस पार्टी ने हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस पार्टी ने इस बार प्रतिभा सिंह से लेकर आनंद शर्मा तक कई दिग्गजों को दरकिनार करते हुए युवा चेहरे को तरजीह दी है जो लंबे समय से जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं।

अनुराग शर्मा को कांग्रेस पार्टी ने हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस पार्टी ने इस बार प्रतिभा सिंह से लेकर आनंद शर्मा तक कई दिग्गजों को दरकिनार करते हुए उन्हें तरजीह दी है। युवा नेता के नाम के ऐलान से राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज हो गई। तमाम राजनीतिक पंडित हैरान रहे गए जो पिछले कई दिनों से कई दिग्गज नेताओं को रेस में आगे बता रहे थे। लेकिन अनुराग छुपे रुस्तम साबित हुए।
अनुराग शर्मा कांगड़ा जिला अध्यक्ष हैं और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी माने जाते हैं। वह जमीनी स्तर पर पार्टी में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं। 1995 से ही कांग्रेस के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम करते आए हैं,जिनका संभवत: उन्हें इनाम दिया गया है। छात्र नेता के रूप में कांग्रेस पार्टी से जुड़े अनुराग शर्मा राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता पंडित संत राम के करीबी थे और दशकों तक सार्वजनिक जीवन में रहे।
छात्र राजनीति से ही कांग्रेस में सक्रिय
कांगड़ा जिला के बैजनाथ से संबंध रखने वाले अनुराग शर्मा 1990 के दशक से छात्र राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत एनएसयूआई से की और धीरे-धीरे कांग्रेस संगठन में अपनी जगह बनाई। लंबे समय तक संगठन में काम करने के कारण उन्हें जमीनी नेता के तौर पर देखा जाता है। राजनीतिक सफर में वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव भी रह चुके हैं। हाल ही में उन्हें कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था, जिसे उनके बढ़ते संगठनात्मक कद के रूप में देखा गया।

संगठन और खेल दोनों में सक्रिय
अनुराग शर्मा की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रही है। वे इंटरनेशनल बीड़-बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। बीड़-बिलिंग विश्व स्तर पर पैराग्लाइडिंग के लिए मशहूर स्थल माना जाता है और इस क्षेत्र से उनका जुड़ाव उन्हें पर्यटन और खेल गतिविधियों से भी जोड़ता है। शैक्षणिक रूप से अनुराग शर्मा बीए पास हैं और पेशे से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उनका सामाजिक नेटवर्क मजबूत माना जाता है।
सियासी पृष्ठभूमि और पारिवारिक विरासत
अनुराग शर्मा का राजनीतिक झुकाव पारिवारिक पृष्ठभूमि से भी जुड़ा रहा है। उनके पिता प्यारे लाल शर्मा पूर्व में बीडीसी चेयरमैन रह चुके हैं। स्थानीय राजनीति में परिवार की मौजूदगी ने भी उनके राजनीतिक सफर को शुरुआती आधार दिया। कांग्रेस के अंदर उन्हें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का करीबी माना जाता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक संगठन में उनकी सक्रियता और नेतृत्व से निकटता भी टिकट मिलने के कारणों में शामिल हो सकती है।
क्यों अनुराग शर्मा को ही मौका
कांग्रेस नेतृत्व ने संगठन में सक्रिय और जमीनी कार्यकर्ता की छवि वाले अनुराग शर्मा पर दांव खेला है। माना जा रहा है कि कांगड़ा क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने और संगठनात्मक संतुलन साधने की रणनीति के तहत यह फैसला लिया गया है। अनुराग शर्मा को राज्यसभा भेजकर पार्टी ने हिमाचल प्रदेश में जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। इसके अलावा 2024 में मिली हार का सबक भी समझा जा रहा है जब हिमाचल के बाहर का कैंडिडेट देने की वजह से पार्टी को बहुमत के बावजूद हार का सामना करना पड़ा था। तब अभिषेक मनु सिंघवी की बजाय कई कांग्रेसी विधायकों ने भाजपा कैंडिडेट के लिए मतदान किया था।
रिपोर्ट : यूके शर्मा
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