हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के लिए सख्त ड्रेस कोड, जींस-टीशर्ट पर रोक; एक और फरमान
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों के लिए सख्त ड्रेस कोड लागू करने के आदेश दिए हैं। अब सरकारी ऑफिस में जींस और टीशर्ट पहनने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही एक और सरकारी फरमान जारी किया गया है।

हिमाचल प्रदेश की सूक्खु सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड को सख्ती से लागू करने और सोशल मीडिया पर अनुशासन बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के मुताबिक अब दफ्तरों में जींस और टी-शर्ट पहनने पर रोक रहेगी, कर्मचारियों को केवल औपचारिक और सादे कपड़े पहनने होंगे और सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों या राजनीतिक-धार्मिक मुद्दों पर टिप्पणी करने से भी बचना होगा। बिना अनुमति किसी भी सरकारी दस्तावेज या जानकारी को साझा करने पर भी सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा जारी इस आदेश में मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों और विभिन्न बोर्ड, निगम, विश्वविद्यालय और स्वायत्त संस्थाओं के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इन नियमों का पालन सुनिश्चित करें। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कार्यस्थल की गरिमा से जोड़ा
सरकार ने अपने आदेश में 3 अगस्त 2017 को जारी निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि सरकारी कर्मचारियों को हमेशा औपचारिक, साफ-सुथरे और सादे रंगों के कपड़े पहनने चाहिए। कोर्ट में पेशी या कार्यालय में उपस्थिति के दौरान कैजुअल या पार्टी वियर से पूरी तरह परहेज करना होगा। आदेश में कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी का पहनावा उसके पेशेवर व्यवहार और कार्यस्थल की गरिमा को दर्शाता है।
महिला और पुरुष दोनों के लिए ड्रेस कोड
ड्रेस कोड को लेकर आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पुरुष कर्मचारी शर्ट-पैंट, ट्राउजर या कॉलर वाली शर्ट के साथ जूते या सैंडल पहनें, जबकि महिला कर्मचारियों के लिए साड़ी, सलवार-सूट, चूड़ीदार-कुर्ता या अन्य औपचारिक परिधान निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ ही सभी कर्मचारियों को व्यक्तिगत स्वच्छता और साज-सज्जा का भी विशेष ध्यान रखने को कहा गया है, जिससे कार्यालय का माहौल पेशेवर और अनुशासित बना रहे।
सोशल मीडिया के लिए भी सलाह
सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर भी सरकार ने कड़े निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी अपनी निजी सोशल मीडिया अकाउंट, ब्लॉग या अन्य प्लेटफॉर्म पर सरकार की नीतियों, योजनाओं या किसी भी राजनीतिक और धार्मिक विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी न करें। ऐसा करना सेवा नियमों के विरुद्ध माना जाएगा। साथ ही, बिना अनुमति किसी भी सरकारी दस्तावेज, फाइल या आधिकारिक जानकारी को सार्वजनिक करना भी प्रतिबंधित रहेगा।
सरकार ने केंद्र सरकार के आचरण नियमों का उल्लेख करते हुए कहा है कि सरकारी कर्मचारी ऐसा कोई भी कार्य न करें जो उनकी गरिमा के विपरीत हो। नियमों के अनुसार कोई भी सार्वजनिक बयान या टिप्पणी, जिससे सरकार की नीतियों की आलोचना हो या सरकार की छवि प्रभावित हो, अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार बन सकती है। यदि कोई कर्मचारी किसी पुस्तक, लेख या मीडिया में अपनी राय देता है, तो उसे स्पष्ट करना होगा कि वह उसकी व्यक्तिगत राय है, न कि सरकार का आधिकारिक दृष्टिकोण।
आदेश में यह भी कहा गया है कि सरकारी कर्मचारियों को केवल ड्यूटी के दौरान ही नहीं, निजी जीवन में भी जिम्मेदार और मर्यादित व्यवहार बनाए रखना होगा। सोशल मीडिया पर अनुशासन बनाए रखना अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की गैर-जिम्मेदाराना या विवादित पोस्ट से बचना होगा।
सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों का “letter and spirit” में पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही संबंधित विभागों से इन निर्देशों की प्राप्ति की पुष्टि भी मांगी गई है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि आदेश विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध है और सभी अधिकारियों को इसे गंभीरता से लागू करना होगा।
रिपोर्ट : यूके शर्मा
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