Himachal Cuts Cabinet Status for Corporations Boards and Advisors Salaries and Allowances Reduce सुक्खू सरकार के 'तंगहाल'! निगम, बोर्ड और सलाहकारों का कैबिनेट दर्जा खत्म, वेतन-भत्ते भी कटेंगे, Himachal-pradesh Hindi News - Hindustan
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सुक्खू सरकार के 'तंगहाल'! निगम, बोर्ड और सलाहकारों का कैबिनेट दर्जा खत्म, वेतन-भत्ते भी कटेंगे

हिमाचल की सुक्खू सरकार ने आर्थिक दबाव के चलते बड़े फैसले लिए हैं। निगम, बोर्ड और सलाहकारों का कैबिनेट दर्जा खत्म होगा। साथ ही वेतन-भत्तों में भी 20 फीसदी की कटौती होगी।

Tue, 17 March 2026 01:18 PMGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, शिमला
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सुक्खू सरकार के 'तंगहाल'! निगम, बोर्ड और सलाहकारों का कैबिनेट दर्जा खत्म, वेतन-भत्ते भी कटेंगे

हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार ने वित्तीय दबाव के बीच बड़ा और अहम फैसला लिया है। विभिन्न बोर्डों, निगमों और आयोगों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सलाहकारों को दिए गए ‘कैबिनेट रैंक’ का दर्जा तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। इसके साथ ही इन पदाधिकारियों के वेतन और भत्तों में 20 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। ये नियम 30 सितंबर 2026 तक के लिए स्थगित रखे गए हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग (कैबिनेट एवं गोपनीय) की ओर से जारी आदेश में मुख्य सचिव ने सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश दिए हैं कि इस फैसले को तुरंत लागू किया जाए और संबंधित अधिकारियों तक इसकी जानकारी पहुंचाई जाए। सरकार ने यह कदम प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सरल और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है, लेकिन इसके पीछे प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

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कैबिनेट दर्जा खत्म होगा

इस फैसले के तहत अब बोर्डों और निगमों के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन, प्रिंसिपल एडवाइजर और पॉलिटिकल एडवाइजर जैसे पदों पर बैठे लोगों को कैबिनेट मंत्री के समान मिलने वाली सुविधाएं, प्रोटोकॉल और अन्य विशेषाधिकार नहीं मिलेंगे। इससे सरकारी खर्चों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रदेश में इस समय कई राजनेता निगमों व बोर्डों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री के राजनीतिक, मीडिया, आईटी सलाहकार के पद पर भी तैनातियां हैं। इन्हें कैबिनेट रैंक हासिल है और मोटी पगार है।

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गंभीर वित्तीय दबाव में सरकार

दरअसल, हिमाचल प्रदेश इस समय गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है। केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के बंद होने या घटने का असर राज्य की आर्थिक सेहत पर साफ दिखाई दे रहा है। सीमित संसाधनों और बढ़ते खर्चों के बीच सरकार पर वित्तीय संतुलन बनाए रखने की चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है।

फिजूलखर्च रोकेगी सरकार

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले ही संकेत दे चुके हैं कि सरकार को आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कड़े फैसले लेने होंगे। उन्होंने कई बार कहा है कि फिजूलखर्ची पर रोक लगाना और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करना समय की मांग है। ऐसे में कैबिनेट रैंक का दर्जा खत्म करना और वेतन-भत्तों में कटौती को उसी दिशा में उठाया गया ठोस कदम माना जा रहा है।

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गौरतलब है कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब बुधवार से हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। बजट सत्र से ठीक पहले सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में आर्थिक सुधार और खर्चों में कटौती को लेकर और भी बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।

रिपोर्ट : यूके शर्मा

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