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सुक्खू सरकार कड़े किए टैक्स नियम; समय पर सी-फॉर्म जमा नहीं करने पर भारी पेनाल्टी

हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए टैक्स नियम कड़े कर दिए हैं। अब सी-फॉर्म जमा करने में छह महीने से अधिक की देरी पर व्यापारियों को भारी जुर्माना देना होगा। 

Tue, 24 Feb 2026 03:05 PMKrishna Bihari Singh वार्ता, शिमला
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सुक्खू सरकार कड़े किए टैक्स नियम; समय पर सी-फॉर्म जमा नहीं करने पर भारी पेनाल्टी

हिमाचल प्रदेश सरकार ने आगामी बजट से पहले राज्य का राजस्व बढ़ाने के लिए टैक्स नियमों को कड़ा कर दिया है। इसके तहत केंद्रीय बिक्री कर नियमों में बदलाव कर सी-फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया को सख्त बनाया गया है। अब व्यापारियों को फॉर्म जारी होने के छह महीने के भीतर लेनदेन पूरा करना होगा वरना देरी होने पर भारी जुर्माना देना पड़ेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का मानना है कि वित्तीय दबाव के कारण ऐसा कदम उठाया जाना बेहद जरूरी था।

सी-फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया कड़ी

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अनुसार, हिमाचल प्रदेश सरकार साल 2026-27 के बजट से पहले वित्तीय दबाव को कम करने के लिए अपने संसाधनों को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। इसी दबाव के कारण सरकार ने राज्य कर एवं आबकारी विभाग के नियमों में बदलाव करके सी-फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया है।

सी-फॉर्म देरी से जमा करने पर भारी जुर्माना

नये प्रावधानों के तहत अब करदाताओं को सी-फॉर्म देरी से जमा करने पर भारी जुर्माना भरना होगा। हिमाचल प्रदेश के अधिकांश उद्योगों के ग्राहक राज्य के बाहर हैं इसलिए फॉर्म जमा करने में देरी से राजस्व की वसूली प्रभावित हो रही है। नए नियम के अनुसार, व्यवसायी अब घोषणा पत्र या प्रमाण पत्र जारी होने की तारीख से छह महीने के भीतर लेनदेन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

50 हजार रुपये तक लगाया जा सकता है जुर्माना

यदि कोई कारोबारी छह महीने के बाद ऑनलाइन आवेदन करता है तो उसे नए फॉर्म की कीमत का 0.1 प्रतिशत या कम से कम 50,000 रुपये (दोनों में से जो भी अधिक हो) का जुर्माना देना होगा। हालांकि जुर्माना लगाने से पहले संबंधित अधिकारी आवेदक को अपनी बात रखने का मौका देंगे। जुर्माना भरने के बाद ही पुराने फॉर्म को रद्द करके नए फॉर्म जारी करने की सिफारिश की जाएगी।

क्या बोले सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू?

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में कहा कि बड़ी संख्या में उद्योग होने के बावजूद हिमाचल की आय कम रही है। जीएसटी की व्यवस्था मुख्य रूप से उपभोग-आधारित है, जिसके कारण उत्पादक राज्यों को नुकसान होता है। केंद्र के जीएसटी मुआवजे की समाप्ति और अनुदान के बंद करने से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा है। यह संशोधन न केवल कर निर्धारण में आने वाली जटिलताओं को दूर करेगा वरन उद्योगों को समय पर अनुपालन के लिए भी प्रोत्साहित करेगा।

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