हिमाचल में विजिलेंस ब्यूरो अब RTI से बाहर, सरकार ने क्या दी दलील?
हिमाचल सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस ब्यूरो) को RTI अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया है। सरकार की दलील है कि जांच की गोपनीयता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।

हिमाचल में भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसी से अब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लेना आसान नहीं रहेगा। हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक अहम फैसले में विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो को सूचना के अधिकार कानून यानी आरटीआई- 2005 के दायरे से बाहर कर दिया है। ये कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के दौरान कई बार बेहद संवेदनशील सूचनाएं सामने आती हैं जिनके सार्वजनिक होने से जांच प्रभावित हो सकती है।
राज्यपाल ने दी मंजूरी
इस संबंध में हिमाचल प्रदेश सरकार के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने गुरुवार को अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के अनुसार, राज्यपाल ने आरटीआई अधिनियम की धारा 24(4) के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो को आरटीआई कानून के दायरे से बाहर रखने की मंजूरी दी है। यह अधिसूचना राज्य सरकार की ओर से जारी की गई है।
क्या है वजह?
दरअसल, विजिलेंस ब्यूरो भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करता है। इन मामलों में कई बार गुप्त सूचनाएं, दस्तावेज, निगरानी से जुड़ी जानकारी और जांच की रणनीति जैसी संवेदनशील चीजें शामिल होती हैं। यदि यह जानकारी सार्वजनिक हो जाती है तो इससे चल रही जांच प्रभावित हो सकती है या फिर आरोपियों को पहले से जानकारी मिल सकती है। इससे जांच की दिशा बदल सकती है। इसी वजह से यह फैसला लिया गया है।
इस कानून का किया इस्तेमाल
आरटीआई कानून की धारा 24 सरकार को यह अधिकार देती है कि वह कुछ सुरक्षा, खुफिया या संवेदनशील जांच से जुड़े संगठनों को इस कानून के दायरे से बाहर रख सकती है। इसी प्रावधान के तहत केंद्र और कई राज्यों में भी कुछ एजेंसियों को आरटीआई से बाहर रखा गया है। हिमाचल सरकार ने भी इसी प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो को आरटीआई के दायरे से बाहर किया है।
RTI से भी नहीं मिलेगी ये जानकारियां
हालांकि कानून में यह भी स्पष्ट है कि यदि किसी मामले में भ्रष्टाचार या मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है तो कुछ परिस्थितियों में उसे देने का प्रावधान बना रहता है। यानी पूरी तरह से सूचना का रास्ता बंद नहीं होता, लेकिन सामान्य प्रशासनिक या जांच से जुड़ी जानकारी सीधे आरटीआई के माध्यम से उपलब्ध नहीं होगी।
सरकार की क्या दलील
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो सरकारी विभागों, अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली प्रमुख एजेंसी है। यह एजेंसी रिश्वतखोरी, पद के दुरुपयोग और सरकारी संसाधनों के गलत इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच करती है। ऐसे में सरकार की दलील है कि जांच एजेंसी को प्रभावी तरीके से काम करने के लिए जरूरी गोपनीयता मिलनी चाहिए।
रिपोर्ट- यूके शर्मा
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