Himachal Pradesh High Court stays government order barring ASHA workers from Panchayat polls हिमाचल में आशा वर्कर्स पंचायत चुनाव लड़ सकती हैं या नहीं, हाई कोर्ट ने कर दिया साफ, Himachal-pradesh Hindi News - Hindustan
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हिमाचल में आशा वर्कर्स पंचायत चुनाव लड़ सकती हैं या नहीं, हाई कोर्ट ने कर दिया साफ

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने आशा वर्कर्स को अंतरिम राहत देते हुए राज्य सरकार के 2 मई 2026 के पत्र पर रोक लगा दी है। इसमें आशा वर्कर्स को अंशकालिक कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत करके पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया था।

Thu, 7 May 2026 09:42 AMSubodh Kumar Mishra एएनआई, शिमला
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हिमाचल में आशा वर्कर्स पंचायत चुनाव लड़ सकती हैं या नहीं, हाई कोर्ट ने कर दिया साफ

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने आशा वर्कर्स को अंतरिम राहत देते हुए राज्य सरकार के 2 मई 2026 के पत्र पर रोक लगा दी है। इसमें आशा वर्कर्स को अंशकालिक कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत करके पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया था।

हाई कोर्ट का यह आदेश रीना देवी एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में सात आशा वर्कर्स द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान आया। इसमें हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 के प्रावधानों के तहत अयोग्यता को चुनौती दी गई थी।

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खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ताओं के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला बनता है। पीछ ने आदेश दिया कि दिनांक 2 मई के विवादित पत्र पर अगले आदेश तक रोक लगाई जाए। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 1 जून 2026 को तय की है। साथ ही राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार आशा वर्कर्स मानद स्वयंसेवक हैं और नियमित, संविदात्मक या अंशकालिक कर्मचारी नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें निश्चित वेतन या मानदेय के बजाय केवल प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन प्राप्त होते हैं। इसलिए सरकारी कर्मचारियों पर लागू होने वाले आधारों पर उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

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याचिकाकर्ताओं के वकील ने पहले के सरकारी निर्देशों और केंद्रीय दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वैच्छिक कार्यकर्ता हैं, न कि वेतनभोगी कर्मचारी। इससे पंचायती राज संस्थाओं में उनकी भागीदारी की पात्रता और भी पुष्ट होती है। इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। इससे राज्य भर की आशा वर्करों को आगामी पंचायत चुनावों में भाग लेने की अनुमति मिल गई।

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हिमाचल प्रदेश की 3758 पंचायतों में 26, 28 और 30 मई को तीन चरणों में चुनाव होने हैं। प्रधान, उप-प्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य सहित विभिन्न पदों के लिए नामांकन प्रक्रिया 7 मई से शुरू होगी। इस अंतरिम रोक का चुनावी प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि इससे मामले के अंतिम निर्णय तक आशा वर्करों के पंचायत चुनाव में भाग लेने का रास्ता साफ हो गया है।

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