हिमाचल में कब्जाधारियों की बहुएं भी नहीं लड़ सकेंगी पंचायत चुनाव; HC की मुहर
हिमाचल हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें ससुर द्वारा सरकारी जमीन कब्जाने पर बहू के चुनाव लड़ने पर रोक को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि याचिका में जनहित की कमी है।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें सरकारी जमीन पर ससुर के कब्जे के कारण बहू को चुनाव लड़ने से रोकने वाले नियम को चुनौती दी गई थी। मंडी के एक महिला मंडल की ओर से दायर इस जनहित याचिका पर कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई स्पष्ट जनहित नहीं है। कोर्ट के कड़े रुख के बाद याचिकाकर्ता ने मामला वापस ले लिया। बता दें कि सरकार ने हाल ही में पंचायत चुनाव नियमों में बदलाव किया है, जिसके तहत यदि परिवार का मुखिया सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करता है, तो बहू भी चुनाव के लिए अयोग्य होगी।
याचिका में जनहित नहीं
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वाले परिवारों की बहुओं को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने वाले नए कानून को चुनौती दी गई थी। अदालत ने साफ कहा कि दायर की गई याचिका में जनहित नजर नहीं आता और याचिकाकर्ता इस मामले में सीधे तौर पर प्रभावित पक्ष भी नहीं है।
अदालत के समक्ष मंडी जिले की थुनाग तहसील के महिला मंडल बदीन बग्सियाड की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिका की प्रकृति पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि महिला मंडल की ओर से दायर इस याचिका में कोई स्पष्ट जनहित दिखाई नहीं देता। अदालत ने यह भी कहा कि महिला मंडल को इस संशोधन से प्रभावित पक्ष नहीं माना जा सकता।
याचिका खारिज
अदालत ने टिप्पणी की कि यदि कोई ऐसा व्यक्ति, जो वास्तव में इस कानून से प्रभावित है, व्यक्तिगत तौर पर अदालत में याचिका दायर करता है तो कानूनी मुद्दों पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट की इन टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ता की ओर से जनहित याचिका वापस लेने की बात कही गई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
कब्जाधारियों की बहू भी नहीं लड़ सकेगी पंचायत चुनाव
दरअसल, हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में पंचायत चुनाव से जुड़े कानून में अध्यादेश के जरिए बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत यदि किसी परिवार के मुखिया, खासकर ससुर का सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो उस परिवार की बहू भी पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेगी।
सरकार ने खत्म की छूट
पहले के नियमों में परिवार के बेटे, अविवाहित बेटी, दादा-दादी चुनाव लड़ने के अयोग्य माने जाते थे, लेकिन बहुओं को इसमें छूट मिली हुई थी। अब सरकार ने यह छूट भी समाप्त कर दी है। हिमाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि पंचायतों में पारदर्शिता बनाए रखने और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है। सरकार के मुताबिक, पंचायत प्रतिनिधियों के लिए कानून का पालन और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है, इसलिए नियमों को और सख्त किया गया है।
रिपोर्ट- यूके शर्मा
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