himachal govt changed policy on premature release of prisoners serving life sentences हिमाचल सरकार ने उम्रकैदियों की समय से पहले की रिहाई नीति को बदला, अब क्या मानक?, Himachal-pradesh Hindi News - Hindustan
More

हिमाचल सरकार ने उम्रकैदियों की समय से पहले की रिहाई नीति को बदला, अब क्या मानक?

हिमाचल प्रदेश सरकार ने उम्रकैद के कैदियों की समयपूर्व रिहाई के लिए नई नीति लागू कर दी है। इस अधिसूचना के तहत अब राज्य सजा समीक्षा बोर्ड रिहाई पर अंतिम फैसला लेगा। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…

Fri, 16 Jan 2026 07:00 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, शिमला
share
हिमाचल सरकार ने उम्रकैदियों की समय से पहले की रिहाई नीति को बदला, अब क्या मानक?

हिमाचल प्रदेश सरकार ने उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों की समयपूर्व रिहाई को लेकर नई नीति अधिसूचित कर दी है। यह नीति राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी अधिसूचना के जरिए लागू की गई है। नई व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों के अनुरूप बनाई गई है और इसके तहत राज्य में उम्रकैदियों की रिहाई पर फैसला हिमाचल प्रदेश राज्य सजा समीक्षा बोर्ड करेगा। स्पष्ट किया गया है कि उम्रकैदियों की समयपूर्व रिहाई का मतलब स्वतः रिहाई नहीं होगा। हर मामले में अपराध की प्रकृति, जेल में कैदी का आचरण और समाज में पुनर्वास की संभावना जैसे पहलुओं को देखकर ही निर्णय लिया जाएगा।

बोर्ड निकाय करेगा समीक्षा

नई नीति के तहत राज्य सजा समीक्षा बोर्ड एक स्थायी निकाय होगा, जिसकी अध्यक्षता अतिरिक्त मुख्य सचिव या गृह सचिव करेंगे। इसमें कानून सचिव, हाईकोर्ट द्वारा नामित जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुख्य प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस महानिदेशक द्वारा नामित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, एक महिला सदस्य और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य सचिव के रूप में शामिल होंगे। बोर्ड की बैठक के लिए कम से कम चार सदस्यों की उपस्थिति जरूरी होगी।

धारा 475 के तहत 14 साल की सजा के बाद ही रिहाई

अधिसूचना के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 475 के तहत आने वाले उम्रकैदियों को 14 साल की वास्तविक सजा पूरी करने के बाद समयपूर्व रिहाई पर विचार के योग्य माना जाएगा। वास्तविक सजा का मतलब बिना किसी रिमिशन के जेल में बिताया गया समय है।

अपने आप नहीं होगी रिहाई

हालांकि सरकार ने साफ किया है कि 14 साल पूरे होने भर से किसी को अपने आप रिहा नहीं किया जाएगा। सजा समीक्षा बोर्ड यह देखेगा कि कैदी का जेल में आचरण कैसा रहा, क्या उसमें अपराध दोहराने की संभावना खत्म हो चुकी है, क्या वह समाज का उपयोगी सदस्य बन सकता है और उसके परिवार की सामाजिक व आर्थिक स्थिति क्या है।

धारा 475 के तहत आने वाले मामलों में कुल सजा अवधि, रिमिशन समेत, सामान्य तौर पर 20 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन कुछ गंभीर और जघन्य अपराधों में उम्रकैदियों को 20 साल की सजा, रिमिशन सहित, पूरी करने के बाद ही समयपूर्व रिहाई पर विचार किया जाएगा।

25 साल से अधिक नहीं जेल

ऐसे मामलों में कुल अवधि 25 साल से अधिक नहीं होगी। इनमें दुष्कर्म के साथ हत्या, डकैती के साथ हत्या, जेल के भीतर या पैरोल के दौरान की गई हत्या, आतंकवादी घटनाओं में हत्या, तस्करी से जुड़े मामलों में हत्या और ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी की हत्या जैसे अपराध शामिल हैं। इसके अलावा गैंगस्टर, सुपारी किलर, ड्रग तस्कर और अत्यधिक हिंसा या पूर्व नियोजित तरीके से हत्या करने वाले दोषियों को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। जिन कैदियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला गया है, उनके मामलों में भी यही प्रावधान लागू होगा।

धारा-475 के दायरे में नहीं आने वालों पर विचार

नई नीति में उन उम्रकैदियों के लिए भी नियम तय किए गए हैं, जो धारा 475 के दायरे में नहीं आते। ऐसे पुरुष कैदियों को कम से कम 10 साल की वास्तविक सजा और कुल 14 साल की सजा, रिमिशन सहित, पूरी करने के बाद समयपूर्व रिहाई पर विचार किया जा सकेगा।

महिला उम्रकैदियों के लिए सजा कम

वहीं, महिला उम्रकैदियों के लिए यह अवधि कुछ कम रखी गई है। धारा 475 से बाहर की महिला कैदियों को 7 साल की वास्तविक सजा और कुल 10 साल की सजा, रिमिशन सहित, पूरी करने के बाद इस सुविधा के लिए पात्र माना जाएगा।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:आतिशी पर करेंगे कानूनी कार्रवाई, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति का फैसला
ये भी पढ़ें:आम आदमी पार्टी के राजस्थान अध्यक्ष नवीन पालीवाल अरेस्ट, क्या है मामला?
ये भी पढ़ें:उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण से कई मकान और मंदिर हो सकते हैं प्रभावित; विरोध शुरू

14 साल से पहले भी हो सकता है रिहाई पर विचार

सरकार ने यह भी कहा है कि गंभीर बीमारी, अत्यधिक वृद्धावस्था या मानवीय आधार पर 14 साल की वास्तविक सजा से पहले भी किसी उम्रकैदी की रिहाई पर विचार किया जा सकता है। ऐसे मामलों में संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को विशेष अधिकार प्राप्त हैं।

रिपोर्ट- यूके शर्मा

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।