High Court Rejects Plea of Man Seeking live in relationship with Married Woman slams Not Even Maintainable याचिका सुनने योग्य भी नहीं; दूसरे की बीवी की चाहत में अदालत पहुंचे युवक को फटकार, Himachal-pradesh Hindi News - Hindustan
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याचिका सुनने योग्य भी नहीं; दूसरे की बीवी की चाहत में अदालत पहुंचे युवक को फटकार

किसी दूसरे की बीवी की चाहत में हाई कोर्ट पहुंचे युवक को अदालत ने कड़ी फटकार लगाई। कहा कि यह याचिका सुनने योग्य भी नहीं है। अदालत अवैध संबंधों को कानूनी संरक्षण नहीं दे सकती।

Thu, 21 May 2026 10:55 AMGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, शिमला
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याचिका सुनने योग्य भी नहीं; दूसरे की बीवी की चाहत में अदालत पहुंचे युवक को फटकार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी, जिसने एक शादीशुदा महिला को उसके पति और ससुराल वालों के कथित कब्जे से छुड़ाने की मांग की थी। अदालत में सुनवाई के दौरान महिला और याचिकाकर्ता के बीच संबंध की भी बात सामने आई। अदालत ने साफ कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है। एक महिला अपने पति और बच्चे के साथ रह रही है, ऐसे में कोर्ट इस तरह के वैवाहिक विवाद में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अवैध संबंधों को कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता है।

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने 14 मई को यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह का संबंध याचिकाकर्ता और महिला के बीच बताया जा रहा है, उसे न्यायिक मान्यता नहीं दी जा सकती।

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‘अवैध संबंध’ को नहीं दे सकते कानूनी संरक्षण

बार एंड बेंच में छपी रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “हमारी राय में यह याचिका इस रूप में सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि संबंधित महिला अपने पति के साथ रह रही है। ऐसे मामलों में कोर्ट पति-पत्नी के आपसी वैवाहिक विवादों में दखल नहीं दे सकता।” अदालत ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता और महिला के बीच जो संबंध सामने आ रहा है, वह कथित तौर पर विवाहेतर संबंध है और अदालत ऐसे रिश्ते को न्यायिक मान्यता नहीं दे सकती।

महिला को ‘कैद’ में बताकर कोर्ट पहुंचा था युवक

याचिकाकर्ता ने खुद को महिला का करीबी दोस्त बताया था। उसने आरोप लगाया कि महिला ने उसे संदेश भेजकर कहा था कि उसे अपने पति और सास से डर लगता है। युवक ने दावा किया कि महिला को उसके पति और सास ने गैरकानूनी तरीके से घर में रोका हुआ है। इन्हीं आरोपों के आधार पर उसने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर महिला को ‘रिहा’ कराने की मांग की थी।

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सुनवाई में खुला लिव-इन रिलेशन का मामला

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उसका महिला के साथ शारीरिक संबंध था। इसी दौरान यह बात सामने आई कि दोनों कथित तौर पर लिव-इन रिलेशनशिप में थे। कोर्ट के सामने 17 दिसंबर 2025 का एक कथित एग्रीमेंट भी पेश किया गया, जिसमें दोनों के साथ रहने का जिक्र था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

याचिकाकर्ता के वकीलों अंकित धीमान और हेमंत कुमार ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले ‘देवू जी नायर बनाम केरल राज्य’ का हवाला दिया। उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध हिरासत के मामलों में पार्टनर्स और एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों की गरिमा की रक्षा को लेकर दिशा-निर्देश दिए थे।

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हालांकि, हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि वह फैसला इस मामले पर लागू नहीं होता, क्योंकि वहां मामला एक अविवाहित महिला का था, जो अपने माता-पिता के साथ रह रही थी। जबकि यहां महिला शादीशुदा है और अपने पति के साथ रह रही है।

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