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गुजरात में बदलेंगे शादी रजिस्ट्रेशन के नियम, अब माता-पिता को सरकार देगी जानकारी; एक और बड़ी शर्त

गुजरात में शादी के रजिस्ट्रेशन को लेकर बड़े बदलाव होने वाले हैं। नए प्रस्ताव के मुताबिक अब शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए माता-पिता को सूचना देना अनिवार्य होगा। इसके लिए 30 दिन का समय भी तय कर दिया गया है।

Fri, 20 Feb 2026 02:23 PMMohammad Azam लाइव हिन्दुस्तान, अहमदाबाद
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गुजरात में बदलेंगे शादी रजिस्ट्रेशन के नियम, अब माता-पिता को सरकार देगी जानकारी; एक और बड़ी शर्त

गुजरात में शादी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में बड़े बदलाव का प्रस्ताव पेश किया गया है । राज्य सरकार ने गुजरात रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिज एक्ट में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसके तहत अब शादी रजिस्ट्रेशन में ‘परिवार के किसी सदस्य’ को सीधे तौर पर शामिल किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस प्रस्ताव की जानकारी देते हुए कहा कि नई व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों की जानकारी दी जाएगी।

‘पेरेंटल डिक्लेरेशन’ होगा अनिवार्य

गुजरात सरकार के प्रस्तावित नियमों के मुताबिक अब दूल्हा-दुल्हन को आवेदन के दौरान यह घोषणा करनी होगी कि उनके माता-पिता को शादी की जानकारी है या नहीं। इसके बाद सहायक रजिस्ट्रार 10 दिन के अंदर दोनों पक्षों के अभिभावकों को सूचना भेजेंगे। आवेदन के साथ माता-पिता के आधार कार्ड की जानकारी और शादी के कार्ड सहित कई दस्तावेज देने होंगे। इससे प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक विस्तृत और जांच-परक हो जाएगी।

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30 दिन का अनिवार्य वेटिंग पीरियड

तुरंत रजिस्ट्रेशन की सुविधा अब सीमित हो सकती है। प्रस्ताव में आवेदन और सार्टिफिकेट जारी होने के बीच 30 दिन का अनिवार्य अंतर रखा गया है। इस दौरान शादी से जुड़े दस्तावेज, फोटो और गवाहों की डिटेल राज्य सरकार के केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इस मामले की जानकारी देते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि भविष्य में पोर्टल के माध्यम से जैसे ही कोई जोड़ा आवेदन करेगा, माता-पिता को व्हाट्सऐप और मैसेज के जरिए सूचना मिल जाएगी। उनके अनुसार, इससे अभिभावकों की भावनाओं और सभी के अधिकारों की रक्षा होगी।

परंपरा और निजता के बीच संतुलन

सरकार का कहना है कि यह कदम अलग-अलग समुदायों की मांग पर उठाया गया है। हालांकि प्रस्ताव में यह भी स्वीकार किया गया है कि अनिवार्य सूचना और 30 दिन की प्रक्रिया कुछ लोगों को असहज कर सकती है। फिलहाल मसौदे पर 30 दिन तक सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। इन प्रतिक्रियाओं के आधार पर अंतिम नियमों का स्वरूप तय होगा।

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