दिल्ली दंगल हारने के बाद भाजपा के मजबूत गढ़ में ‘सेमीफाइनल’ की जंग, केजरीवाल ने झोंकी ताकत
26 अप्रैल को होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव को केजरीवाल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले “सेमीफाइनल” की तरह देख रहे हैं। उन्होंने पूरी आप को पूरे दम खम के साथ यहां झोंक दिया है, क्योंकि यहां दांव सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि गुजरात में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने का है।

दिल्ली की कुर्सी गंवाने के बाद अरविंद केजरीवाल अब नई राजनीतिक लड़ाई की तैयारी में हैं। उनकी नजर भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ गुजरात पर टिक गई है। 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद यह पहला मौका है, जब आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी आमने-सामने होंगी। 26 अप्रैल को होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव को केजरीवाल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले “सेमीफाइनल” की तरह देख रहे हैं। उन्होंने पूरी आप को पूरे दम खम के साथ यहां झोंक दिया है, क्योंकि यहां दांव सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि गुजरात में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने का है।
दिल्ली दंगल में भाजपा ने आप को दी थी पटखनी
एक दशक से दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी साल 2025 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार गई थी। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक जैसे दिग्गज आप नेता भी अपनी सीट नहीं बचा सके थे। 70 सीटों वाली दिल्ली में आप के हाथ केवल 22 सीट लगी थीं, बाकी 48 पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया था। इस तरह पूरे 27 साल बाद भाजपा ने दिल्ली में ग्रैंड एंट्री मारी थी और आम आदमी पार्टी को सरकार से बाहर कर दिया था।
निकाय चुनाव को केजरीवाल क्यों मान रहे सेमीफाइनल
दिल्ली की कुर्सी हाथ से गई, तो केजरीवाल समेत पूरी आप ने राष्ट्रीय विस्तार के लिए नई योजना बनानी शुरू कर दी। उन राज्यों को चुना, जहां आप पहले से थोड़ी मौजूदगी बना चुकी है। इस कड़ी में गुजरात अहम है। क्योंकि 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए 5 सीटें जीती थीं और करीब 13 फीसदी वोट शेयर प्राप्त किया था। ऐसे में अप्रैल में हो रहे निकाय चुनाव को केजरीवाल ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का "सेमीफाइनल" माना है। इसे जीतने के लिए उन्होंने पूरा दम-खम झोंक दिया है।

भाजपा के मजबूत किले को भेदने में आप को मिलेगी चुनौती
लेकिन केजरीवाल के लिए ये सब एकदम आसान नहीं होने वाला है। क्योंकि, गुजरात वह प्रदेश है जहां बीते दो दशकों से भाजपा सत्ता पर काबिज है। अगर बीते विधानसभा चुनाव की बात करें, तो 182 सीटों में 156 सीटें भाजपा ने झटकते हुए बहुमत को अपने नाम किया था। कांग्रेस 17 ने सीटों को अपने नाम किया था। ऐसे में आम आदमी पार्टी को न केवल भाजपा के साथ बल्कि कांग्रेस के साथ भी मुकाबला करना होगा। हालांकि बीते चुनाव में आप के प्रदर्शन को देखते हुए इसे एक उम्मीद के किरण की तरह देखा जा रहा है। भाजपा को हराने के क्रम में आप कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगा सकती है।
लोकल चुनाव ही संगठन की असली परीक्षा
स्थानीय निकाय चुनाव किसी भी पार्टी के लिए जमीनी ताकत का असली टेस्ट होते हैं। यहां बड़े चेहरे नहीं, बल्कि संगठन और कैडर काम आता है। AAP ने पिछले कुछ महीनों में गुजरात में संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान और लोकल मुद्दों पर सक्रियता बढ़ाई है। आम आदमी पार्टी आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष फोकस कर रही है। केजरीवाल और उनके सहयोगी बार-बार गुजरात दौरे कर रहे हैं, जिससे साफ है कि पार्टी इस चुनाव को हल्के में नहीं ले रही। उनका लक्ष्य सिर्फ सीटें जीतना नहीं, बल्कि भाजपा के “अभेद किले” में दरार डालना है। इस तरह अगर गुजरात में पार्टी अच्छा प्रदर्शन कर पाती है, तो उसके काडर में विश्वास बढ़ेगा और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में और मजबूती से लड़ाई लड़ पाएगी।
जानिए गुजरात निकाय चुनाव की तारीखें
सबसे पहले आपको बता दें कि गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों का ऐलान हो चुका है। 26 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 28 अप्रैल को नतीजे घोषित होंगे। प्रदेश की 9992 सीटों पर वोटिंग होने के लिए 6 अप्रैल से नामांकन पत्र भरना शुरू होगा। इसकी आखिरी तारीख 11 अप्रैल है। अगर किसी को अपना नामांकन वापस लेना है, तो 13 अप्रैल तक कर सकता है। महानगरपालिका, पालिका, जिला और तालुका पंचायतों के लिए एक ही दिन वोटिंग होगी।
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