25 साल बाद पत्नी की हत्या में उम्रकैद, लकवाग्रस्त पति को गुजरात HC ने सुनाया बड़ा फैसला
गुजरात हाईकोर्ट ने 25 साल पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए लकवाग्रस्त ईश्वरजी ठाकोर को पत्नी की हत्या का दोषी पाया और उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने निचली अदालत के 7 साल की सजा के पुराने फैसले को पलटते हुए धारा 302 के तहत यह आदेश दिया।

गुजरात हाईकोर्ट ने 25 साल पुराने हत्या के केस में बड़ा फैसला सुनाया है। लकवे से पीड़ित 50 साल के ईश्वरजी ठाकोर को पत्नी की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई है। ठाकोर अपनी बीमारी के चलते खुद चल-फिर भी नहीं पाते। लेकिन कोर्ट ने उनके पुराने 7 साल के फैसले को पलटते हुए उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
अक्टूबर 2000 में बनासकांठा जिले के दियोदर तालुका में ईश्वरजी ने अपनी पत्नी वर्षा पर चाकू से 8-9 वार किए थे। 2002 में ट्रायल कोर्ट ने इसे पूर्व नियोजित हत्या नहीं माना और उन्हें धारा 304 (भाग-1) के तहत 7 साल की सजा सुनाई थी। उसी समय उन्हें जमानत भी मिल गई थी।
सरकार की अपील पर हाईकोर्ट ने बदला फैसला
राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की और दावा किया कि यह साफ हत्या का मामला है। हाईकोर्ट की जस्टिस अनिरुद्ध मायी और जस्टिस एल.जे. ओडेडरा की बेंच ने मामले की गहन जांच की। कोर्ट ने पाया कि आरोपी के पास पहले से चाकू था और कई घातक वार किए गए थे। इसलिए पूर्व नियोजन का दावा सही नहीं ठहराया जा सकता।
कोर्ट का आदेश
बेंच ने कहा, "धारा 304 (भाग-1) के तहत दोषसिद्धि रद्द की जाती है। आरोपी को धारा 302 के तहत हत्या का दोषी ठहराया जाता है और आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है।"
स्वास्थ्य को देखते हुए दी गई कुछ राहत
सजा सुनाने के दौरान कोर्ट को बताया गया कि ईश्वरजी लकवाग्रस्त हैं, वे अकेले चल नहीं सकते और रोजमर्रा के काम भी नहीं कर पाते। उन्हें नियमित फिजियोथेरेपी और दवाइयों की जरूरत है। उनके वकील ने घर पर नजरबंदी की मांग की, लेकिन कोर्ट ने उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। साथ ही यह व्यवस्था दी कि जेल प्रशासन और संबंधित अधिकारी कानून के अनुसार समय से पहले रिहाई (remission) की जांच कर सकते हैं। कोर्ट ने ईश्वरजी को 31 मार्च तक जेल में सरेंडर करने की मोहलत दी है।
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