7 साल की बच्ची से रेप करने वाले को मौत की सजा, कोर्ट ने दुर्लभतम मामला बताया; 3 बच्चों का बाप है दोषी
गुजरात में 7 साल की बच्ची से रेप के दोषी को मौत की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने इसे इसे दुर्लभतम मामला माना और 44 दिन के अंदर सजा सुना दी। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि गुजरात सरकार हर बेटी की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

गुजरात में 7 साल की बच्ची से रेप के दोषी को मौत की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने इसे इसे दुर्लभतम मामला माना और 44 दिन के अंदर सजा सुना दी। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि गुजरात सरकार हर बेटी की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
गुजरात के राजकोट शहर की एक अदालत ने शनिवार को 7 साल की एक बच्ची के साथ रेप और लोहे की रॉड से यौन उत्पीड़न के मामले में एक आदमी को मौत की सजा सुनाई। यह फैसला अपराध के 44 दिनों के भीतर सुनाया गया। विशेष पोक्सो न्यायाधीश वी.ए. राणा ने मध्य प्रदेश के अलीराजपुर निवासी 32 साल के रामसिंह दुडवा को रेप और गंभीर यौन उत्पीड़न के लिए बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाया।
तीन बच्चों के पिता है दोषी
यह घटना 4 दिसंबर को जिले के अटकोट कस्बे के पास कानपार गांव के बाहरी इलाके में घटी। आरोपी ने बच्ची को उस समय अगवा कर लिया जब वह अपने चचेरे भाइयों के साथ एक खेत में खेल रही थी और उसे बाइक पर बिठाकर ले गया।
तीन बच्चों के पिता दुडवा ने बच्ची को पास की झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ रेप किया। उसने लोहे की रॉड से भी उसके साथ यौन उत्पीड़न किया और उसे खून से लथपथ और दर्द से तड़पती हुई छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने उसे 8 दिसंबर को गिरफ्तार किया। आरोपी को तब पैर में गोली लगी जब उसने पुलिसकर्मियों पर लोहे की रॉड से हमला करने की कोशिश की, जब वे सबूत इकट्ठा कर रहे थे। अटकोट पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया।
पीड़िता का बयान निर्णायक साबित हुआ
पुलिस ने 19 दिसंबर को आरोप पत्र दाखिल किया और अदालत ने 12 जनवरी को उसे दोषी ठहराया। अदालत ने इसे दुर्लभतम मामला मानते हुए दुडवा को मौत की सजा सुनाई। अपराध स्थल से मिले मानव बाल के डीएनए का मिलान आरोपी के डीएनए से हो गया था। जांच के दौरान जब्त की गई लोहे की रॉड से प्राप्त खून के नमूने का मिलान पीड़िता के खून से हुआ। पीड़िता का बयान इस मामले में निर्णायक साबित हुआ। पीड़िता के परिवार ने कोर्ट को पत्र लिखकर त्वरित सुनवाई और आरोपी के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि गुजरात सरकार का स्पष्ट संदेश। हमारी बेटियों पर हमला मतलब जीवन का अंत। उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री के रूप में मैं यह स्पष्ट कर रहा हूं कि गुजरात में लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति हमारी नीति जीरो टॉलरेंस की है। उन्होंने कहा कि अटकोट पोक्सो मामले में एफआईआर से लेकर सजा तक की पूरी प्रक्रिया मात्र 40 दिनों में पूरी हो गई।
उन्होंने लिखा कि यह महज एक मामला नहीं है। यह एक सशक्त संदेश है। बेटियों पर हाथ उठाने वालों के लिए कोई दया नहीं, केवल कठोर दंड। इस सफल कार्रवाई के लिए मैं राजकोट ग्रामीण पुलिस, सरकारी वकीलों और संपूर्ण न्याय प्रणाली को हार्दिक बधाई देता हूं। उनकी त्वरित कार्रवाई, समर्पण और पेशेवर रवैये के कारण एक निर्दोष बेटी को समय रहते न्याय मिला।
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