केंद्र सूरत से बनाने जा रहा नया 'ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे', 12 घंटे से भी कम वक्त में पूरा होगा दिल्ली-मुंबई का सफर
गडकरी ने बताया कि वर्तमान समय में उत्तर भारत से दक्षिण भारत जाने के लिए सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद होते हुए मुंबई, पुणे और कोल्हापुर से शोलापुर होकर जाना पड़ता है। जिसके चलते इन शहरों में रहने वाले लोगों को भारी यातायात और भीड़भाड़ का सामना करना पड़ता है।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि केंद्र सरकार उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक नई कनेक्टिविटी देते हुए एक नया 'ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे' बनाने जा रही है। उन्होंने बताया कि यह हाईवे गुजरात के सूरत से आंध्र प्रदेश के कुरनूल तक बनेगा और इसके बनने के बाद दिल्ली और चेन्नई के बीच की दूरी 320 किलोमीटर कम हो जाएगी, साथ ही दिल्ली और मुंबई के बीच लगने वाला यात्रा का समय भी 12 घंटे से कम हो जाएगा।
प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए गडकरी ने कहा कि यह हाईवे उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। उन्होंने बताया कि यह नया ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे सूरत से शुरू होकर नासिक, अहमदनगर, सोलापुर और कुरनूल तक जाएगा। इसके बाद वहां से आगे यह चेन्नई, कन्याकुमारी, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोचीन से जुड़ेगा।
320 km कम होगी दिल्ली-चेन्नई की दूरी
गडकरी ने बताया कि, 'इस नए हाईवे के बनने से दिल्ली और चेन्नई के बीच की दूरी 320 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिसके चलते ना केवल इससे ईंधन की काफी बचत होगी और यात्रा की लागत भी कम आएगी। साथ ही हाईवे होने की वजह से यात्रा में लगने वाले समय की भी काफी बचत होगी। इसके अलावा इसके बनने के बाद मुंबई-दिल्ली की यात्रा में लगने वाला समय भी 12 घंटे से कम हो जाएगा।'
फिलहाल सूरत, वडोदरा और अहमदाबाद से होकर है रूट
गडकरी ने बताया कि वर्तमान समय में उत्तर भारत से दक्षिण भारत जाने के लिए सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद होते हुए मुंबई, पुणे और कोल्हापुर से सोलापुर होकर जाना पड़ता है। जिसके चलते इन शहरों में रहने वाले लोगों को भारी यातायात और भीड़भाड़ का सामना करना पड़ता है। आगे उन्होंने कहा, लेकिन नए हाईवे के बनने के बाद इन शहरों को भारी यातायात और जाम दोनों समस्याओं से काफी हद तक मुक्ति मिल जाएगी। सूरत-कुरनूल ग्रीन एक्सप्रेसवे को उन्होंने एक ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का काम पहले ही 70-80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। वहीं अब यह सूरत-कुरनूल ग्रीन हाईवे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच व्यापार और आवाजाही की तस्वीर बदल देगा।'
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