गैस संकट पर गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, उद्योगों की सप्लाई में 50 फीसदी की कटौती
गैस आपूर्ति में आ रही दिक्कतों को देखते हुए गुजरात सरकार ने घरेलू रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का फैसला किया है। इसके लिए उद्योगों को दी जाने वाली गैस आपूर्ति में 50 फीसदी तक की कटौती की गई है ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।

ईरान-इजराइल युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में गंभीर संकट पैदा हो गया है। इससे गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। इसे देखते हुए गुजरात सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। गुजरात के ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल ने बताया कि घरों में रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उद्योगों को दी जाने वाली गैस में 50 फीसदी तक की कटौती की गई है। इसके अलावा उर्वरक और दूध प्रसंस्करण उद्योगों के लिए भी आपूर्ति में 40 फीसदी की कमी की गई है। सरकार की प्राथमिकता आम जनता की रसोई है इसलिए घरेलू गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखा गया है। राहत की बात यह भी कि कमर्शियल सिलेंडरों पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
…ताकि चलती रहे हर घर की रसोई
गुजरात के ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल ने मंगलवार को विधानसभा सत्र से पहले पत्रकारों को बताया कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि किसी भी घर में रसोई गैस सिलेंडर की कमी न हो।
उद्योगों को सप्लाई में 50 प्रतिशत तक की कटौती
गैस की घरेलू खपत को प्राथमिकता देने के लिए कुछ औद्योगिक उपयोगों पर रोक लगा दी गई है। घरेलू रसोई गैस की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उद्योगों को दी जाने वाली गैस में 50 प्रतिशत तक की कटौती कर दी गई है।
दूध प्रसंस्करण उद्योगों के लिए भी कटौती
गुजरात के ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि उर्वरक और दूध प्रसंस्करण उद्योगों के लिए गैस आपूर्ति में करीब 40 फीसदी की कटौती की गई है ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस की नियमित आपूर्ति मिलती रहे।
कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की जारी रहेगी आपूर्ति
राजकोट में होटलों और रेस्तरां के कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों पर प्रतिबंध के सवाल पर पटेल ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसी कोई कटौती या प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। ऋषिकेश पटेल ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि घरों की रसोई चलती रहे और घरेलू गैस आपूर्ति में कोई बाधा ना आए।
PNG, CNG और LPG को पहली प्राथमिकता
वहीं केंद्र सरकार ने देश में पैदा होने वाली प्राकृतिक गैस के बंटवारे के नियमों में बदलाव किया है। अब नई व्यवस्था के तहत एलपीजी बनाने, सीएनजी और पाइप वाली रसोई गैस (पीएनजी) को सबसे पहले सप्लाई की जाएगी। इन खास क्षेत्रों की जरूरतें पूरी होने के बाद ही दूसरी जगहों को गैस दी जाएगी। नए नियम में पीएनजी, सीएनजी और एलपीजी उत्पादन को लिस्ट सबसे ऊपर रखा गया है।
उर्वरक क्षेत्र को भी तरजीह
प्राकृतिक गैस के बंटवारे के नियमों में उर्वरक क्षेत्र को दूसरी प्राथमिकता दी गई है। उसकी पिछले छह महीने की औसत मांग का कम से कम 70 फीसदी हिस्सा पूरा किया जाएगा।
इस सूची में तीसरे स्थान पर चाय उद्योग, विनिर्माण और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को रखा गया है। इन्हें परिचालन उपलब्धता के आधार पर पिछले छह महीने की औसत गैस खपत का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराया जाएगा। शहरी गैस वितरण (सीजीडी) कंपनियों द्वारा औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को की जाने वाली आपूर्ति को प्राथमिकता सूची में चौथे स्थान पर रखा गया है।
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