ease pressure on cities by 2030 five satellite towns will develop in Gujarat बड़े शहरों पर दबाव कम करने गुजरात में विकसित होंगे 5 ‘सैटेलाइट टाउन’, इन सिटीज का नाम हुआ फाइनल, Gujarat Hindi News - Hindustan
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बड़े शहरों पर दबाव कम करने गुजरात में विकसित होंगे 5 ‘सैटेलाइट टाउन’, इन सिटीज का नाम हुआ फाइनल

सरकार की इस योजना से बड़े शहरों के पास स्थित छोटे शहरों में ना केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि वे विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे और नागरिक-केंद्रित सुविधाओं से भी लैस होंगे। जो आगे चलकर बड़े शहरों पर जनसंख्या व ट्रैफिक का दबाव कम करेंगे।

Sat, 3 Jan 2026 06:40 PMSourabh Jain पीटीआई, अहमदाबाद, गुजरात
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बड़े शहरों पर दबाव कम करने गुजरात में विकसित होंगे 5 ‘सैटेलाइट टाउन’, इन सिटीज का नाम हुआ फाइनल

गुजरात के बड़े शहरों में जनसंख्या का दबाव कम करने के लिए आने वाले चार सालों में यहां मेट्रो शहर जैसी सुविधाओं और आर्थिक क्षमता वाले 5 सैटेलाइट शहर विकसित किए जाएंगे। इस दौरान अहमदाबाद के करीब साणंद, वडोदरा के पास में सावली, गांधीनगर के निकट कलोल, सूरत के पास बारडोली और राजकोट के करीब स्थित हीरासर शहर को सैटेलाइट टाउन के रूप में विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार की तरफ से इस बात की जानकारी एक प्रेस नोट जारी करते हुए दी गई।

सैटेलाइट शहरों में होंगी ये सब सुविधाएँ

सरकार ने बताया कि सैटेलाइट टाउन बनाने के लिए इन शहरों में अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा, इलेक्ट्रिक बस सेवाओं के साथ सुव्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन, आधुनिक जल आपूर्ति सिस्टम और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली, रिंग रोड, शहरी वन पार्क, सुन्दर झीलें, आधुनिक फायर स्टेशन और कार्यालयों के आसपास घर व दुकानों के साथ मिश्रित उपयोग वाला बुनियादी ढांचा बनाया जाएगा। प्रेस नोट की मानें तो इन शहरों का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए राज्य सरकार सिटी प्लानर्स की मदद लेगी और इस काम के लिए टेंडर जारी करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

पीएम मोदी के विजन के अनुरूप हो रहा काम

प्रेस नोट में आगे बताया गया कि साल 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने और हर राज्य के समग्र विकास में तेजी लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टियर-2 और टियर-3 शहरों के रणनीतिक विकास की कल्पना की है। इसी विजन को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने राज्य के पांच शहरों को 'सैटेलाइट टाउन' के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है। ऐसे में सरकार अगले चार सालों में यानी सन् 2030 तक इन शहरों को मेट्रो शहरों जैसी सुविधाओं से लैस करने और उनकी आर्थिक क्षमता को मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है। सरकार यह सब इसलिए कर रही है, ताकि बड़े शहरों पर भविष्य में बढ़ने वाले दबाव को कम किया जा सके।

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क्या होते हैं सैटेलाइट टाउन?

बता दें कि सैटेलाइट टाउन से तात्पर्य एक ऐसे छोटे शहर से है जो किसी बड़े शहर के पास स्थित हो, और जहां घंटेभर के अन्दर पहुंचा जा सकता हो। सरकार की इस योजना से इन शहरों में ना केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि वे विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे और नागरिक-केंद्रित सुविधाओं से भी लैस होंगे।

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