सावधान! RE-NEET पेपर दिलाने का दावा कर ठगी, ऐसे बना रहे थे छात्रों को शिकार; दो आरोपी गिरफ्तार
RE-NEET Exam 2026: अहमदाबाद साइब्रर क्राइम ब्रांच टीम ने टेलिग्राम के जरिए ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी री-नीट का प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का लालच देकर छात्रों और अभिभावकों से पैसे ले रहे थे।

RE-NEET Exam 2026: नीट-यूजी री-एग्जाम 21 जून को आयोजित होने जा रहा है। इससे पहले ही प्रश्न पत्र मुहैया करवाने के नाम पर साइबर फ्रॉड के भी अलग-अलग मामले सामने आ रहे हैं जिसमें छात्रों और अभिभावकों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में अब अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने इंटर-स्टेट साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है जो कि री-नीट के प्रश्न पत्र मुहैया करवाने के नाम पर छात्रों और अभिभावकों को ठग रहा था।
पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को जयपुर और कोटा से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने प्रेस नोट जारी कर जानकारी दी है कि गिरोह छात्रों को दावा करता था कि वे उन्हें री-नीट का प्रश्न पत्र मुहैया करवा सकते हैं। पुुलिस के मुताबिक इसके साथ ही ठग परीक्षा से जुड़े अन्य झुठे और गुमराह करने वाले वादे भी कर रहे थे। लालच में आकर छात्र और अभिभावक पैसे दे रहे थे। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2) और 54 और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66(डी) के तहत केस दर्ज कर लिया है।
टेलिग्राम पर बनाए थे अलग-अलग चैनल और आईडी
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने टेलेग्राम पर अलग-अलग चैनल और आईडी बनाई हुई थी। और इनपर इस तरह के पोस्ट, मैसेज और विज्ञापन जारी किए जिनमें दावा किया जाता था कि उनके पास री-नीट का प्रश्न पत्र है और वे छात्रों को भी मुहैया करवा सकते हैं। इसके साथ ही परीक्षा से जुड़ी अन्य गोपनीय जानकारी देने का वादा कर छात्रों और उनके माता-पिता से पैसे ले रहे थे। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने करीब 8 टेलेग्राम चैनल बनाए हुए थे।
अलग-अलग राज्यों से 12 शिकायतें
आरोपियों की पहचान समर सिंह और आकाश के रूप में हुई है और दोनों राजस्थान के रहने वाले हैं। आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों से 12 शिकायतें मिली हैं जो कि आरोपियों के बैंक अकाउंट से जुड़ी हैं। जांच में आरोपियों के बैंक खातों से लगभग 1.5 करोड़ रुपये की ट्रांजेक्शन सामने आई है।
ठगी की रकम को ऐसे छिपा रहे थे
जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को छिपाने के लिए आरोपी गेमिंग वेबसाइट्स में इस्तेमाल होने वाले बैंक अकाउंट्स की जानकारी जुटाई। और फिर ठगी की रकम के असली सोर्स को छिपाने के लिए पैसों को इनमें ट्रांसफर करते थे। इसके बाद अकाउंट्स में आए पैसों को गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में भेज देते थे। इसके बाद अपने बैंक अकाउंट्स और अन्य जानने वाले लोगों के बैंक अकाउंट्स में रकम को ट्रांसफर कर लेते थे। आरोपियों ने 44 अन्य वेबसाइट्स बनाई जिनका इस्तेमाल गेमिंग-बेटिंग और साइबर फ्रॉड गतिविधियों में कर रहे थे।
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