बुलडोजर का ऐसा कहर! गुजरात में पत्थर-पत्थर कर दिए गए 1500 घर; VIDEO
राजकोट नगर निगम द्वारा इस अभियान के दौरान लगभग 87,000 स्क्वेयर मीटर जमीन खाली कराई जा रही है, जिसकी कीमत लगभग 312 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। यह जमीन चल रहे रिवर फ्रंट डेवलपमेंट और TP रोड प्रोजेक्ट के लिए जरूरी है।

गुजरात के राजकोट शहर में नगर निगम ने अबतक का अपना सबसे बड़ा तोड़-फोड़ अभियान चलाते हुए शहर में अवैध रूप से बने 1500 घरों में से 1119 घरों को गिरा दिया, वहीं अभियान के दूसरे दिन मंगलवार को बाकी बचे अन्य घरों को गिराने की कार्रवाई भी जारी है। नगर निगम का यह अभियान अजी नदी के किनारे जंगलेश्वर क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा के बीच चल रहा है और इसका मकसद अजी नदी के किनारों को अतिक्रमण से मुक्त कराते हुए उसके प्राकृतिक बहाव को वापस लौटाना है, साथ ही नदी के पास स्थित शहर के कुछ निचले हिस्सों में आने वाली बाढ़ को रोकना भी है।
कार्रवाई के लिए इलाके को 7 जोन में बांटा गया
अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए पूरे जंगलेश्वर क्षेत्र को 7 जोन में बांटा गया है, और हर जोन को क्लास-1 ऑफिसर हेड कर रहे हैं, और उन्हें टेक्निकल स्टाफ, सुपरवाइजर और फील्ड वर्कर सपोर्ट कर रहे हैं। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 2,500 से ज्यादा पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों को भी तैनात किया गया। इस दौरान 1 हजार से ज्यादा निगम कर्मचारी 260 से ज्यादा जेसीबी, ट्रैक्टर, ब्रेकर, डंपर, मिट्टी खोदने जैसी भारी मशीनों की मदद से इस कार्रवाई को अंजाम दे रहे हैं। इनमें 64 JCB, 90 ट्रैक्टर, 7 हिताची, 50 ब्रेकर, 42 गैस कटर और 14 डंपर शामिल हैं।

87 हजार स्क्वेयर मीटर जमीन कराई जा रही खाली
इस अभियान के दौरान लगभग 87,000 स्क्वेयर मीटर जमीन खाली कराई जा रही है, जिसकी कीमत लगभग 312 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। यह जमीन चल रहे रिवर फ्रंट डेवलपमेंट और TP रोड प्रोजेक्ट के लिए जरूरी है। अधिकारियों ने बताया कि यहां से जिन लोगों को बेदखल किया जा रहा है, उनमें से कई लोग पिछले 50 सालों से यहां रह रहे हैं। यहां शुरू में झोपड़ियां थीं और बाद में पक्के घर बन गए।
कार्रवाई के तीन दिन तक चलने की उम्मीद
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के आदेश के बाद राजकोट नगर निगम (RMC) द्वारा शहर के जंगलेश्वर क्षेत्र में सोमवार को इस तोड़फोड़ अभियान को शुरू किया गया। मामले की जानकारी देते हुए राजकोट जोन-1 की पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हेतल पटेल ने बताया था कि चूंकि अवैध संपत्तियां 2.5 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई हैं, इसलिए ध्वस्तीकरण अभियान तीन दिन तक चलने की उम्मीद है।
कार्रवाई से पहले इलाके में पानी व बिजली के कनेक्शन काटे गए
उन्होंने बताया था कि सोमवार को कार्रवाई शुरू होने से पहले अधिकारियों ने पिछले दो दिनों में स्वेच्छा से अपनी संपत्तियां खाली करने वाले निवासियों की सहायता की थी। इससे पहले यहां रहने वाले लोगों को नोटिस जारी किए गए थे ताकि वह इस कार्रवाई के लिए तैयार रहे। साथ ही उन्होंने बताया कि यह ध्वस्तीकरण शुरू करने से पहले पानी तथा बिजली के कनेक्शन काट दिए गए थे।
2500 से ज्यादा पुलिस बल तैनात किए गए
पटेल ने कहा, 'स्थानीय पुलिस, निगरानी दल, ड्रोन निगरानी इकाइयां, विशेष अभियान समूह के कर्मी, त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) और राज्य आरक्षित पुलिस बल सहित 2,500 से अधिक पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है और वे ध्वस्तीकरण प्रक्रिया के दौरान संयुक्त रूप से घटनास्थल पर कार्रवाई करेंगे।'
उधर सोमवार को इस कार्रवाई के शुरू होने से दशकों से इलाके में रहने वाले लोगों में आक्रोश पैदा हो गया। उनमें से कुछ ने दावा किया कि उन्हें ध्वस्तीकरण अभियान के बारे में केवल तीन दिन पहले ही सूचित किया गया था और वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि वे कहां जाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें सड़कों पर रहना पड़ सकता है।
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