क्या आपका डाटा शेयर करता है WhatsApp? सुप्रीम कोर्ट में कंपनी ने किया खुलासा WhatsApp Denies Data Sharing with Meta in Supreme Court Hearing Amid Privacy Policy and CCI Fine Row, Gadgets Hindi News - Hindustan
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क्या आपका डाटा शेयर करता है WhatsApp? सुप्रीम कोर्ट में कंपनी ने किया खुलासा

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान WhatsApp ने कहा कि वह यूजर्स का डाटा Meta के साथ शेयर नहीं करता और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से प्राइवेसी सेफ रखता है। यह मामला 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़े बड़े कानूनी विवाद से जुड़ा है।

Tue, 24 Feb 2026 05:46 PMPranesh Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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क्या आपका डाटा शेयर करता है WhatsApp? सुप्रीम कोर्ट में कंपनी ने किया खुलासा

मेसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान एक बड़ा खुलासा किया है और उन सवालों का जवाब दिया है, जो यूजर्स लंबे वक्त से पूछ रहे थे। कंपनी ने बताया है कि वह अपने यूजर्स का डाटा अपनी पैरेंट कंपनी Meta Platforms के साथ शेयर नहीं करता। कंपनी ने कोर्ट को भरोसा दिया कि उसका सिस्टम हाई-लेवल प्राइवेसी फीचर्स पर बेस्ड है और पर्सनल मेसेजेस की सुरक्षा के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। यह पूरा मामला 2021 की विवादित प्राइवेसी पॉलिसी और कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की ओर से लगाए गए जुर्माने से जुड़ा हुआ है।

सुनवाई के दौरान WhatsApp की लीगल टीम ने कहा कि यह दावा गलत है कि यूजर डाटा को अन्य Meta प्लेटफॉर्म्स के साथ ‘फ्रीली’ शेयर किया जाता है। कंपनी ने साफ किया कि पर्सनल चैट्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं, यानी उन्हें केवल भेजने वाला और रिसीव करने वाला ही पढ़ सकता है। कंपनी का कहना है कि उसने भारतीय कानूनों का किसी भी तरह से उल्लंघन नहीं किया है। WhatsApp ने अपने बचाव में Digital Personal Data Protection Act, 2023 का हवाला दिया।

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कंपनी के मुताबिक यह कानून पहले से ही डाटा प्रोटेक्शन के पहलुओं को कवर करता है और वह इसी के हिसाब से यूजर्स की जानकारी को प्रोसेस करती है। कंपनी ने यह भी दोहराया कि यूजर प्राइवेसी उसकी प्राथमिकता है।

CCI का जुर्माना और NCLAT का आदेश बना मुद्दा

मामले की शुरुआत तब हुई जब Competition Commission of India (CCI) ने WhatsApp पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। CCI का आरोप था कि 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी में यूजर्स को डाटा शेयरिंग टर्म्स को मानने के लिए फोर्स किया गया था। CCI ने इसे ‘टेक इट ऑर लीव इट’ पॉलिसी कहा था और मार्केट में कंपनी की मजबूत स्थिति के गलत इस्तेमाल के तौर पर देखा।

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WhatsApp ने इस आदेश को National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) में चुनौती दी थी। ट्रिब्यूनल ने जुर्माने को बरकरार रखा लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यूजर्स की पसंद और परमिशन की सुरक्षा होनी चाहिए। NCLAT ने साफ किया कि डाटा कलेक्शन, उसके इस्तेमाल और ड्यूरेशन के बारे में यूजर्स को साफ विकल्प दिए जाएं। साथ ही, गैर-जरूरी डाटा कलेक्शन के लिए साफ और वापस ली जा सकने वाली परमिशन जरूरी हो।

प्राइवेसी सुरक्षा को लेकर WhatsApp का दावा

WhatsApp ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह 16 मार्च, 2026 तक NCLAT के निर्देशों का पालन करेगा। कंपनी ने कहा कि यूजर्स को Meta के साथ डाटा शेयरिंग के बारे में साफ और आसान विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा, कंपनी ने अपनी एन्क्रिप्शन टेक्नोलॉजी को लेकर एक हलफनामा भी दाखिल किया है।

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बता दें, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने भी पिछली सुनवाइयों में प्राइवेसी को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। अदालत ने संकेत दिया था कि करोड़ों यूजर्स के अधिकारों का उल्लंघन किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया था कि क्या पर्सनल डाटा का कॉमर्शियल यूज सब्सक्राइबर्स के लिए सही है या नहीं।

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