‘सॉरी पापा..’ एक गेम, 50 टास्क और तीन मौतें: क्या है ये कोरियन गेम का खेल?
गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की मौत के बाद ऑनलाइन ‘कोरियन टास्क-बेस्ड गेम्स’ चर्चा में हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भावनात्मक जुड़ाव और मानसिक दबाव ऐसे गेम्स को खतरनाक बना देता है।

गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। 12, 14 और 16 साल की इन बहनों ने कथित तौर पर एक ऑनलाइन ‘कोरियन गेम’ से जुड़े टास्क पूरे करते-करते अपनी जान दे दी। उनके पीछे मिला सुसाइड नोट और डायरी इस ओर इशारा करती है कि वे एक ऐसे डिजिटल जाल में फंस चुकी थीं, जहां गेम, भावनात्मक जुड़ाव और मानसिक दबाव आपस में मिल चुके थे। यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं है, बल्कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी है।
आखिर ये कोरियन गेम्स हैं क्या?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ‘कोरियन गेम’ कोई एक आधिकारिक या लोकप्रिय मेनस्ट्रीम गेम कैटेगरी नहीं है। इस मामले में जिस गेम का जिक्र सामने आया है, उसे अलग-अलग रिपोर्ट्स में ‘Korean Love Game’ या ‘Korean Lover Game’ कहा जा रहा है। यह कथित तौर पर एक ऑनलाइन, टास्क-बेस्ड और इमोशनली जुड़ाव बनाने वाला गेम या ऐप है, जो आम मोबाइल गेम्स से अलग तरीके से काम करता है।
गेम्स की शुरुआत आम तौर पर बेहद मासूम लगती है। इसमें चैट करना, किसी वर्चुअल कैरेक्टर से बातें करना, अपनी भावनाएं शेयर करना या रोजाना छोटे-छोटे टास्क पूरे करना शामिल होता है, लेकिन धीरे-धीरे यही टास्क खिलाड़ी की पूरी जिंदगी का फोकस बन जाते हैं।
टास्क-बेस्ड गेम्स कैसे बनते हैं खतरनाक?
ऐसे गेम्स की कंस्ट्रक्शन लेवल्स या डेज (levels/days) में होती है। शुरुआत में खिलाड़ी को यह महसूस कराया जाता है कि वह किसी खास मिशन, रिश्ते या ‘स्पेशल कनेक्शन’ का हिस्सा है। यही एहसास आगे चलकर मानसिक दबाव की वजह बन जाता है। गेम्स में सबसे पहले भावनात्मक जुड़ाव बनाया जाता है। खिलाड़ी को वर्चुअल लव, अपनापन या समझदारी का एहसास दिलाया जाता है, जो खासकर किशोरों को गहराई से प्रभावित करता है।
बाद में धीरे-धीरे मानसिक दबाव बढ़ाया जाता है। टास्क टाइम-बाउंड होते हैं (सीमिय समय में करने होते हैं) और यह भावना पैदा की जाती है कि ‘अगर आज टास्क पूरा नहीं किया तो कुछ गलत हो जाएगा।' इसके साथ-साथ प्लेयर्स की असली दुनिया से दूरी बढ़ने लगती है। पढ़ाई, परिवार और दोस्तों से कटाव हो जाता है, नींद और लाइफस्टाइल बिगड़ने लगता है।
कुछ मामलों में टास्क पूरे ना करने पर डर, अपराधबोध या नुकसान की स्थिति भी पैदा की जाती है। यहीं से खेल मनोरंजन नहीं रह जाता, बल्कि माइंड कंट्रोल और मानसिक दबाव की वजह बन जाता है।
क्या यह ‘Blue Whale Challenge’ जैसा ही है?
कई एक्सपर्ट्स और मीडिया रिपोर्ट्स इस तरह के गेम्स की तुलना ऐसे ही जानलेवा Blue Whale Challenge से कर रहे हैं। उस चुनौती में भी करीब 50 दिनों तक टास्क दिए जाने और आखिर में खुद को नुकसान पहुंचाने वाले कदम उठाने जैसी बातें सामने आई थीं। हालांकि, हर मामले में पूरी समानता जरूरी नहीं है, लेकिन टास्क-बेस्ड कंट्रोल और मानसिक दबाव का पैटर्न जरूर मिलता-जुलता दिख सकता है।
साफ करना जरूरी है कि हर कोरियन गेम या हर ऑनलाइन गेम खतरनाक नहीं होता। कोरिया में बने कई वैलिड और सेफ गेम्स दुनिया भर में खेले जाते हैं। असली खतरा उन अनाधिकृत, संदिग्ध और इमोशनली हेरफेर करने वाले ऐप्स से है, जो बच्चों और किशोरों की मानसिक कमजोरियों को निशाना बनाते हैं।
किशोर सबसे ज्यादा प्रभावित क्यों होते हैं?
किशोरावस्था भावनात्मक रूप से सबसे सेंसिटिव टाइम होती है। पहचान की तलाश, अकेलापन, सोशल एक्सेप्टेंस की चाह और कल्पनाओं की दुनिया, ये सभी चीजें उन्हें ऐसे गेम्स की ओर जल्दी अट्रैक्ट कर सकती हैं। जब कोई ऐप या गेम उन्हें समझने वाला, अपना या खास होने का एहसास कराता है, तो वे असली दुनिया की तुलना में उसी डिजिटल दुनिया में ज्यादा सुकून खोजने लगते हैं।
साफ है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों को पूरी तरह अकेला छोड़ देना खतरनाक हो सकता है। जरूरी है कि बच्चों के मोबाइल और ऐप्स पर निगरानी रखी जाए। उनके बिहेवियर में अचानक आने वाले बदलाव, जैसे- चुप्पी, नींद की कमी या पढ़ाई से दूरी को हल्के में ना लिया जाए।
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