ग्राहकों को झटका, 35 फीसदी तक महंगे हो सकते हैं Laptop, यहां देखें फायदे वाली डील्स
Laptop खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो तुरंत खरीदारी कर लीजिए, क्योंकि लैपटॉप जल्द महंगे होने वाले हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में लैपटॉप की कीमतों में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, क्योंकि कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत की वजह से दुनिया भर के मैन्युफैक्चरर्स पर दबाव बढ़ रहा है।
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Laptop खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो तुरंत खरीदारी कर लीजिए, क्योंकि लैपटॉप जल्द महंगे होने वाले हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में लैपटॉप की कीमतों में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, क्योंकि कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत की वजह से दुनिया भर के मैन्युफैक्चरर्स पर दबाव बढ़ रहा है। हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेमोरी और ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPUs) जैसे मुख्य कंपोनेंट्स की ज्यादा लागत के कारण लैपटॉप की कीमतें 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। माना जा रहा है कि इन पार्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि टेक कंपनियां AI के मौजूदा दौर को बढ़ावा देने के लिए लगातार डेटा सेंटर बना रही हैं।

मेमोरी और GPU की कीमतें लैपटॉप की लागत में बढ़ोतरी का कारण बन रही हैं
इंडस्ट्री के सूत्रों का हवाला देते हुए, मनीकंट्रोल ने बताया है कि लैपटॉप की कीमतें 20 से 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं, जो सेगमेंट और कॉन्फिगरेशन पर निर्भर करेगा। ज्यादा मेमोरी कैपेसिटी या हाई-एंड जीपीयू वाले मॉडल्स पर, कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद है। इसका असर ग्राहकों पर पड़ सकता है, खासकर भारत जैसे कीमत के प्रति संवेदनशील बाजार में।
शुरुआत में बढ़ी हुई कीमत खुद झेल सकती हैं कपनियां
हालांकि ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) शुरू में कीमत में हुई बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा खुद उठाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन कंपोनेंट की कीमतों पर लगातार पड़ रहे दबाव के कारण लैपटॉप की सभी कैटेगरी में कीमतों में बदलाव होने की खबरें हैं, और आखिरकार इसका बोझ ज्यादा रिटेल कीमतों के रूप में ग्राहकों पर ही पड़ेगा। गेमिंग लैपटॉप और हाई-परफॉर्मेंस मशीनें उन सेगमेंट में से हैं जिन पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि ये डिस्क्रीट जीपीयू और हाई-स्पीड मेमोरी मॉड्यूल पर निर्भर होते हैं, जिनकी पिछले कुछ समय से कमी बताई जा रही है।
यह रिपोर्ट, मार्केट इंटेलिजेंस फर्म काउंटरपॉइंट रिसर्च और IDC का हवाला देते हुए यह भी कहती है कि इस साल ग्लोबल पीसी मार्केट 8 प्रतिशत तक सिकुड़ सकता है। उत्पादों की ज्यादा रिटेल कीमत और स्लो रिप्लेसमेंट साइकिल को उपभोक्ता मांग में कमी के पीछे के कारणों के तौर पर बताया गया है, खासकर कीमत के प्रति संवेदनशील बाजारों में।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से DRAM और NAND मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत, और साथ ही लैपटॉप में इस्तेमाल होने वाले GPU
s की बढ़ी हुई कीमतों के कारण हो रही है। बताया जा रहा है कि हाल की तिमाहियों में मेमोरी बनाने वाली कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया है, जिसके चलते सप्लाई कम हो गई है और बाजार में कीमतें बढ़ गई हैं।
इसके साथ ही, ऐसा कहा जा रहा है कि हाई-परफॉर्मेंस जीपीयू की मांग में बढ़ोतरी हुई है; AI वर्कलोड के विस्तार और डेटा सेंटर की जरूरतों के कारण इनकी मांग बढ़ी है और कीमतें भी बढ़ गई हैं।
यह नई रिपोर्ट मार्केट रिसर्च फर्म ट्रेंडफोर्स के हालिया अनुमानों से मेल खाती है, जो यह भी उम्मीद करती है कि आने वाली तिमाहियों में मेमोरी की कीमतें बढ़ेंगी। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में DRAM कॉन्ट्रैक्ट की कीमतें 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं; इसकी वजह सप्लाई में कमी और ऊपर बताए गए सेक्टरों से बढ़ती मांग है। फर्म यह भी उम्मीद करती है कि इसी दौरान NAND फ्लैश की कीमतें भी लगभग 3 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।
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