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महिला आरक्षण के लिए होगा विशेष सत्र? इतनी जल्दी में क्यों है मोदी सरकार, किस बात की चिंता

मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्ष की ओर से संसदीय कार्य़ मंत्री को खत लिखा है। अब खबर है कि सरकार इस संबंध में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों को साधना चाहती है। यही वजह है कि होम मिनिस्टर अमित शाह खुद विपक्षी दलों से बात कर रहे हैं।

Tue, 24 March 2026 04:44 PMSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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महिला आरक्षण के लिए होगा विशेष सत्र? इतनी जल्दी में क्यों है मोदी सरकार, किस बात की चिंता

a [महिला आरक्षण ऐक्ट में संशोधन के लिए सरकार की तैयारी जोरों पर है। विपक्षी दलों के साथ भी सरकार बात कर रही है। इस बीच मंगलवार को विपक्षी दलों ने भी मीटिंग की और सरकार से पूछा है कि आखिर आप इसमें क्या बदलाव चाहते हैं। यदि आप हमें विस्तार से जानकारी देंगे, तभी हम अपनी राय दे सकेंगे और बताएंगे कि हम समर्थन कर पाएंगे अथवा नहीं। इस संबंध में मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्ष की ओर से संसदीय कार्य़ मंत्री को खत लिखा है। अब खबर है कि सरकार इस संबंध में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों को साधना चाहती है। यही वजह है कि होम मिनिस्टर अमित शाह खुद विपक्षी दलों से बात कर रहे हैं।

वहीं सरकार के कुछ सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि महिला आरक्षण के संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है। सरकार कई संभावनाओं पर फिलहाल विचार कर रही है। पहला यह कि सहमति बन जाए तो इसी सत्र को बढ़ाकर बिल लाए जाएं। ऐसा ना हो तो फिर क्या विशेष सत्र लाया जा सकता है या फिर मॉनसून सेशन तक इंतजार ही कर लिया जाए। दरअसल सरकार इस मसले पर जल्दबाजी में इसलिए भी दिख रही है क्योंकि सीटें बढ़ने की स्थिति में परिसीमन होगा और चुनाव आयोग को लंबी मशक्कत करनी होगी। ऐसी स्थिति में कम से कम दो साल का वक्त चाहिए। 2026 का मार्च चल ही रहा है।

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यदि अब अगले कुछ महीनों में बिल को मंजूरी मिली तो पूरी प्रक्रिया होते-होते 2029 के आम चुनाव करीब होंगे। ऐसे में सरकार पर्याप्त समय लेकर चलना चाहती है। किसी विवाद से बचने के लिए सरकार ने फिलहाल 2011 की जनगणना को ही आधार मानते हुए आरक्षण लागू करने का फैसला लिया है। इसके अलावा उसी के आधार पर सीटों की संख्या भी बढ़ेगी। इस कदम से दक्षिण भारत के राज्यों की चिंता भी दूर होगी। तमिलनाडु में एमके स्टालिन से लेकर आंध्र में चंद्रबाबू नायडू तक इस बात की चिंता जता चुके हैं। उनका कहना था कि दक्षिण के राज्यों ने आबादी को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है। ऐसे में उनकी सीटों का अनुपात कम हुआ तो यह जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को लागू करने की एक सजा जैसा होगा।

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2011 की जनगणना वाली दलील से माने दक्षिण भारत के दल

अब जब सरकार ने 2011 को ही आधार वर्ष मान लिया है तो फिर दक्षिण के राज्यों को राहत मिली है। अब टीडीपी, वाईएसआर और डीएमके जैसे दलों के समर्थन की सरकार को उम्मीद है। खबर है कि लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने के लिए सीटों को 50 फीसदी बढ़ाया जाएगा। इस तरह कुल सीटों की संख्या 816 होने का अनुमान है और यूपी की संख्या 120 हो जाएगी। महाराष्ट्र से 72 सांसद होंगे और बिहार के 60 सांसद रहेंगे। इसी तरह बंगाल में सीटों की संख्या 42 से बढ़कर 63 हो जाएगी।

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