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महिला आरक्षण का लॉटरी से होगा फैसला, 15 साल वाला क्या नियम; साउथ के राज्य क्यों खुश

महिला आरक्षण का फैसला लॉटरी की व्यवस्था से किया जाएगा। सीटों को लेकर लॉटरी डाली जाएगी और फिर जिन सीटों पर महिला आरक्षण लागू होगा, वह 15 साल के लिए रहेगा। इसके बाद रोटेशन होगा। यही नहीं साउथ इंडिया के दलों को भी सरकार राजी करने में जुटी है और इसके सकारात्मक संकेत भी मिले हैं।

Tue, 24 March 2026 12:19 PMSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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महिला आरक्षण का लॉटरी से होगा फैसला, 15 साल वाला क्या नियम; साउथ के राज्य क्यों खुश

महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू करने की तैयारी हो रही है। 2023 में पारित इस ऐक्ट में अब संशोधन की तैयारी है क्योंकि पहले 2034 के आम चुनाव से आरक्षण लागू किया जाना था, लेकिन अब सरकार को लगता है कि अगले आम चुनाव से ही यह व्यवस्था लागू कर दी जाए। इसके लिए विपक्ष सहमति बनाने की कोशिशें चल रही हैं। पहले महिला आरक्षण में संशोधन का विधेयक कैबिनेट में रखा जाएगा और फिर मंजूरी के बाद दोनों सदनों में वोटिंग के लिए आएगा। सरकार चाहती है कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही 2029 के आम चुनाव में महिला आरक्षण लागू हो जाए। इस आरक्षण के साथ ही विधानसभाओं और लोकसभा में सीटों का गणित बदलेगा।

अब तक मिली जानकारी के अनुसार लोकसभा और सभी राज्यों के सदनों में 50 फीसदी सीटें बढ़ जाएंगी। फिर कुल सीटों में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू होगा। अब सवाल यह है कि आखिर यह महिला आरक्षण कैसे तय होगा और इनके लिए सीटों पर फैसला कैसे होगा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि महिला आरक्षण का फैसला लॉटरी की व्यवस्था से किया जाएगा। सीटों को लेकर लॉटरी डाली जाएगी और फिर जिन सीटों पर महिला आरक्षण लागू होगा, वह 15 साल के लिए रहेगा। इसके बाद रोटेशन होगा।

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SC और ST वाली सीटों में कैसे लागू होगा महिला आरक्षण

अब एक अहम सवाल यह है कि एससी, एसटी आरक्षण वाली सीटों पर क्या होगा? इसका जवाब यह दिया जा रहा है कि यह आरक्षण वर्टिकल होगा यानी एससी और एसटी कोटे में भी महिलाओं की 33 फीसदी हिस्सेदारी होगी। फिलहाल लोकसभा में 84 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। नई व्यवस्था में यह आंकड़ा बढ़कर 136 हो जाएगा और एसटी सीटों की संख्या भी 47 से बढ़कर 70 हो जाएगी। इसी में महिलाओं के लिए भी 33 फीसदी सीटें तय होंगी। इस तरह महिलाओं का वर्ग अनुसार आरक्षण भी एक तरह से तय हो जाएगा।

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आखिर क्यों साउथ के दलों से भी मिल गई है सहमति

इस बीच आरक्षण में संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए होम मिनिस्टर अमित शाह ने खुद गैर-कांग्रेसी विपक्षी नेताओं से सोमवार को बात की। इस बैठक में समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव मौजूद थीं तो वहीं एनसीपी-एसपी की नेता सुप्रिया सुले भी रहीं। शिवसेना (उद्धव ठाकरे) से संजय राउत थे तो वहीं असजदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता भी बैठक में थे। सरकारी सूत्रों का कहना है कि इन विधेयकों को टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों ने भी समर्थन देने की बात कही है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार ने आरक्षण और सीटों के अनुपात को तय करने में 2011 की जनगणना को ही आधार मानने का फैसला लिया है।

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