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गद्दाफी से जंग, ISIS से लड़ाई और अब भारत में अरेस्ट; कौन है अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक?

NIA ने म्यांमार विद्रोहियों को ड्रोन ट्रेनिंग देने के आरोप में विवादित अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को गिरफ्तार किया है। पढ़ें इस 'वॉर एडिक्ट' की पूरी कुंडली और भारत की सुरक्षा से जुड़ा यह खास एक्सप्लैनर।

Wed, 18 March 2026 08:39 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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गद्दाफी से जंग, ISIS से लड़ाई और अब भारत में अरेस्ट; कौन है अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक?

भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 13 मार्च को एक बड़े काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन के तहत सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें छह यूक्रेनी नागरिक और एक बेहद चर्चित अमेरिकी नागरिक- मैथ्यू आरोन वैनडाइक शामिल हैं। खुद को डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर, पूर्व पत्रकार और 'फ्रीडम फाइटर' बताने वाला 46 वर्षीय वैनडाइक असल में अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का एक ऐसा किरदार है, जिसे कई अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक भाड़े का सैनिक मानते हैं। कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किए गए वैनडाइक और अन्य आरोपियों पर म्यांमार के विद्रोही गुटों को हथियारों और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने का गंभीर आरोप है। आइए वैनडाइक की 'कुंडली' को विस्तार से समझते हैं।

भारत के लिए चिंता का विषय: म्यांमार, ड्रोन और पूर्वोत्तर की सुरक्षा

NIA की FIR और शुरुआती जांच के अनुसार, यह मामला सीधे तौर पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमाओं से जुड़ा है। इन विदेशी नागरिकों की कार्यप्रणाली कुछ इस तरह रही है। वैनडाइक और उसके यूक्रेनी साथी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए। इसके बाद वे बिना 'रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट' (RAP) या 'इनर लाइन परमिट' के मिजोरम के संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों से होते हुए अवैध रूप से म्यांमार में दाखिल हुए। इन पर आरोप है कि इन्होंने म्यांमार में सक्रिय कुछ जातीय सशस्त्र संगठनों (EAGs) से संपर्क किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन सशस्त्र संगठनों के तार भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय उग्रवादी गुटों से जुड़े हुए हैं। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क कथित तौर पर यूरोप से भारत के रास्ते भारी मात्रा में ड्रोन्स लेकर म्यांमार पहुंचा था। वहां इनका मकसद म्यांमार के गुटों को ड्रोन वॉरफेयर, असेंबली, जैमिंग तकनीक और आधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण देना था। वर्तमान में सभी सात आरोपियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत 11 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया गया है।

मैथ्यू वैनडाइक की पूरी 'कुंडली' और विवादित अतीत

मैथ्यू वैनडाइक बाल्टीमोर (मैरीलैंड) में जन्मा है और उसने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से सिक्योरिटी स्टडीज में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। उसने अपना अधिकांश जीवन दुनिया भर के अलग-अलग वॉर-जोन यानी युद्ध क्षेत्रों में बिताया है।

लीबिया में गद्दाफी के खिलाफ जंग (2011)

वैनडाइक पहली बार अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में तब आया, जब वह मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों (राष्ट्रीय मुक्ति सेना) के साथ विदेशी लड़ाके के तौर पर शामिल हो गया। युद्ध के दौरान उसे पकड़ लिया गया और वह कुख्यात अबू सलीम जेल में 5 महीने से ज्यादा समय तक युद्धबंदी (POW) रहा। बाद में विद्रोहियों के त्रिपोली पर कब्जे के दौरान वह जेल से भागने में सफल रहा।

सीरिया और इराक में ISIS के खिलाफ अभियान

लीबिया के बाद उसने सीरिया और इराक का रुख किया। 2014 में उसने अपने पत्रकार दोस्तों की ISIS द्वारा हत्या के बाद 'संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल' (SOLI) नामक संस्था बनाई। यह एक गैर-लाभकारी सैन्य संगठन है, जो सत्तावादी शासनों और आतंकियों से लड़ रहे बलों को सैन्य प्रशिक्षण और आपूर्ति मुहैया कराता है।

यूक्रेन युद्ध में सक्रियता, वेनेजुएला के खुफिया ऑपरेशन्स

मार्च 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से वैनडाइक और उसका संगठन यूक्रेन में सक्रिय रहे हैं, जहां उन्होंने यूक्रेनी नागरिकों और सेना को युद्ध और काउंटर-ड्रोन तकनीक की ट्रेनिंग दी। उसने खुद एक लड़ाके के तौर पर यूक्रेनी सेना में भी भर्ती होने का दावा किया था। उसने सार्वजनिक रूप से यह भी स्वीकार किया है कि वह 2019 से वेनेजुएला में निकोलस मादुरो की सरकार को गिराने के लिए वहां के विद्रोहियों के साथ खुफिया अभियान चला रहा था और उनकी फंडिंग कर रहा था।

'फ्रीडम फाइटर' या खुफिया एजेंसी का मोहरा?

वैनडाइक की पहचान को लेकर कूटनीतिक और रणनीतिक हलकों में हमेशा बहस होती रही है। वैनडाइक के युद्ध के अनुभवों पर 'पॉइंट एंड शूट' नाम की एक डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है, जिसने 2014 में ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में अवार्ड जीता था। आलोचकों का मानना है कि वह कैमरे के पीछे छिपकर युद्ध लड़ता है, जिससे पत्रकारिता की तटस्थता खत्म होती है।

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CIA से संबंधों के आरोप

उसे कई बार अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का 'प्रॉक्सी' या 'एसेट' कहा गया है। हालांकि, वैनडाइक ने हमेशा इसका खंडन किया है। उसका कहना है कि उसने CIA की भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा जरूर लिया था, लेकिन पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट में घबराहट के कारण फेल हो जाने से वह एजेंसी में शामिल नहीं हो सका। विशेषज्ञ मानते हैं कि वैनडाइक की निजी विचारधारा संयोग से हर उस संघर्ष क्षेत्र में अमेरिकी रणनीतिक हितों के साथ पूरी तरह मेल खाती है, जहां वह कदम रखता है। वह ऐसे काम करता है जिसे कोई भी आधिकारिक सरकार सीधे तौर पर नहीं कर सकती।

मैथ्यू वैनडाइक और यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी के जरिए भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक बेहद सख्त और स्पष्ट कूटनीतिक संदेश दिया है। 2021 के तख्तापलट के बाद से म्यांमार गृहयुद्ध की चपेट में है। इस अस्थिरता का सीधा असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ता है। इस पूरी कार्रवाई का लब्बोलुआब यह है कि भारत अपनी संप्रभु सीमा और भूमि का इस्तेमाल किसी भी विदेशी नेटवर्क द्वारा प्रॉक्सी युद्ध छेड़ने या सीमा पार के विद्रोही गुटों को मजबूत करने के लिए हरगिज नहीं होने देगा।

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