क्या है 'चाइना+1' रणनीति जिसका भारत-US ट्रेड डील फाइनल होने पर निर्मला सीतारमण ने किया जिक्र?
वित्त मंत्री के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील होने के बाद अब 'चाइना+1' रणनीति को पूरी तरह से लागू करने का रास्ता बन सकता है। सीतारमण ने उम्मीद जताई है कि यह डील भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी।

ने India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी बातचीत के बाद आखिरकार एक व्यापार समझौते पर मंजूरी बन गई है। जल्द ही इस समझौते को लेकर आधिकारिक घोषणा भी की जाएगी। इस समझौते कर अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ अहम टिप्पणियां की हैं। निर्मला सीतारमण ने हाल ही में हिन्दुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि इस डील से 'चाइना+1' रणनीति लागू करने का रास्ता पूरी तरह खुल जाएगा।
वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई है कि यह डील भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी। सीतारमण ने एक सवाल के जवाब में कहा, "यह एक बहुत अच्छा कदम है और इससे हमारे एक्सपोर्टर्स को बड़ी राहत मिलेगी।" उन्होंने आगे उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील मुश्किल हालातों से बाहर निकलने में मदद करेगी। उन्होंने कहा, "बातचीत के बाद, मुझे लगता है कि अब चीजें बदलेंगी। अब आप देखेंगे कि चाइना+1 रणनीति पूरी तरह से लागू होगी।”
क्या है चाइना+1 रणनीति?
चाइना+1 एक ऐसी रणनीति है जिसका मकसद व्यवसायों को चीन पर निर्भरता कम करने और अपने निवेश के क्षेत्रों को दूसरे देशों में फैलाने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह शब्द 2013 में चलन में आया था, जब चीन में मैन्युफैक्चरिंग की लागत बेहद कम होने की वजह से, यहां ग्लोबल बिजनेस का बहुत ज्यादा जमावड़ा देखा गया था।
आसान शब्दों में इस रणनीति का मकसद व्यवसायों को चीन के अलावा कम से कम एक और देश को अपने इन्वेस्टमेंट पूल में शामिल करना है। बिजनेस स्टैंडर्ड की पहले की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सहित 18 ग्लोबल अर्थव्यवस्थाओं के एक समूह ने इस सप्लाई-चेन डाइवर्सिफिकेशन रणनीति के तहत एक साथ काम किया है। अन्य देश जिन्हें लोकप्रिय +1 डेस्टिनेशन के रूप में देखा जाता है, उनमें थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया शामिल हैं।
ट्रेड डील से भारत को क्या नफा?
इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सहमति बनने की घोषणा करते हुए कहा था कि भारत से आयात पर शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा। उनके मुताबिक इस समझौते के तहत भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार बाधाएं कम करने और रूस के बजाय अमेरिका एवं वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने पर सहमति जताई है। द्विपक्षीय व्यापार समझौता लागू होने पर भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में लगने वाला शुल्क अधिकांश एशियाई देशों के स्तर यानी 15 से 19 प्रतिशत के दायरे में आ जाएगा।
संशोधित 18 प्रतिशत शुल्क वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रमुख क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों पर लगाए गए 20 प्रतिशत शुल्क से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता बहाल होने की संभावना है। वहीं इस कदम से परिधान, फुटवियर और आभूषण जैसे श्रम-बहुल निर्यात क्षेत्रों को खासी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और ऑर्डर प्रवाह अगस्त में लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क से बुरी तरह प्रभावित हुए थे।
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