Who is sergio gor US india ambassador trade deal trump modi friendship 50 से सीधे 18! भारत-US डील के 'मास्टरमाइंड' सर्जियो गोर ने कैसे सुलझाया टैरिफ विवाद? इनसाइड स्टोरी, India News in Hindi - Hindustan
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50 से सीधे 18! भारत-US डील के 'मास्टरमाइंड' सर्जियो गोर ने कैसे सुलझाया टैरिफ विवाद? इनसाइड स्टोरी

जानिए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बारे में, जिन्होंने भारत-US व्यापार समझौते में अहम भूमिका निभाई। ट्रंप के सबसे भरोसेमंद 'संकटमोचक' से लेकर ऐतिहासिक टैरिफ कटौती तक, पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Tue, 3 Feb 2026 10:07 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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50 से सीधे 18! भारत-US डील के 'मास्टरमाइंड' सर्जियो गोर ने कैसे सुलझाया टैरिफ विवाद? इनसाइड स्टोरी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात भारत के साथ एक बड़े व्यापार समझौते की घोषणा की। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर बड़े अक्षरों और भारी-भरकम आंकड़ों वाले एक पोस्ट के जरिए। लेकिन इस बड़ी खबर का संकेत सोमवार को ही नई दिल्ली में ट्रंप के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दे दिया था। 38 वर्षीय सर्जियो गोर ने मुश्किल से एक महीने पहले ही भारत में अमेरिकी राजदूत का कार्यभार संभाला है। टैरिफ विवादों और रणनीतिक चुनौतियों के इस दौर में वे भारत-अमेरिका संबंधों को नया आकार देने वाले ट्रंप के मुख्य वास्तुकार बनकर उभरे हैं।

शुरुआत से ही सकारात्मक रुख

गोर ने कार्यभार संभालने से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ट्रंप की ओर से एक खास तोहफा भेजा था- दोनों नेताओं की एक साइन की हुई तस्वीर, जिस पर संदेश लिखा था- मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, आप महान हैं। हालांकि, इस बीच ट्रंप ने भारत पर यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद करने का आरोप लगाया और टैरिफ बढ़ाने की धमकियां भी दीं, लेकिन गोर शुरू से ही सकारात्मक बने रहे। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने जोर दिया था कि दोनों देश व्यापार को लेकर सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। वर्तमान समझौता इसी वादे की पुष्टि करता है।

सर्जियो गोर: उज्बेकिस्तान से वाशिंगटन तक का सफर

सर्जियो गोर की कहानी किसी 'अमेरिकन ड्रीम' से कम नहीं है। उनका जन्म 1986 में उज्बेकिस्तान (तत्कालीन सोवियत संघ) में सर्गेई गोरोखोव्स्की के रूप में हुआ था। बाद में उनका नाम छोटा करके 'सर्जियो गोर' कर दिया गया। उनका परिवार माल्टा में रहने के बाद 1990 के दशक के अंत में अमेरिका चला गया, जहां गोर को अमेरिकी नागरिकता मिली। उनके माता-पिता रूसी मूल के हैं और उनकी मां के पास इजरायली नागरिकता भी थी।

जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में स्नातक करने के बाद, उन्होंने रिपब्लिकन हलकों में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने सीनेटर रैंड पॉल के कार्यालय से शुरुआत की और धीरे-धीरे ट्रंप के आंतरिक घेरे में शामिल हो गए।

ट्रंप के 'संकटमोचक' और 'मेयर ऑफ मार-ए-लागो'

सर्जियो गोर ने 2020 में 'ट्रंप विक्ट्री फाइनेंस कमेटी' के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में अपनी धन जुटाने की क्षमता साबित की। ट्रंप की चुनावी हार के बावजूद वे उनके वफादार बने रहे। उन्होंने ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ मिलकर एक पब्लिशिंग हाउस शुरू किया, जिसने ट्रंप की कई बेस्टसेलर किताबें प्रकाशित कीं।

राजदूत बनने से पहले, गोर वाइट हाउस के कार्मिक कार्यालय के निदेशक थे, जहां उन्होंने 4000 केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति में 'लॉयल्टी टेस्ट' सुनिश्चित किया ताकि प्रशासन में केवल विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध लोग ही रहें।

ट्रंप परिवार से उनकी निकटता इतनी अधिक है कि उन्हें ट्रंप के गोल्फ रिसॉर्ट के कारण 'मेयर ऑफ मार-ए-लागो' कहा जाता है। वे वहां के कार्यक्रमों में डीजे की भूमिका भी निभाते रहे हैं।

भारत में नई पारी और 'Pax Silica'

अगस्त 2025 में उनकी नियुक्ति की घोषणा हुई और जनवरी 2026 में उन्होंने पद संभाला। नई दिल्ली पहुंचते ही उन्होंने ट्रंप और मोदी की व्यक्तिगत दोस्ती पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा- असली दोस्त असहमत हो सकते हैं, लेकिन अंत में अपने मतभेदों को सुलझा लेते हैं।

गोर ने दो महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं-

  1. डोनाल्ड ट्रंप अगले एक-दो वर्षों में भारत का दौरा कर सकते हैं।
  2. भारत को 'पैक्स सिलिका' गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण, जो सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और AI बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है।

व्यापार समझौता और 'लिमिटलेस पोटेंशियल'

सर्जियो गोर की कोशिशों का नतीजा तब दिखा जब अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने का फैसला किया। इस समझौते से ठीक पहले गोर ने पोस्ट किया था- राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी प्रधानमंत्री मोदी से बात की है। बने रहें।" इसके कुछ घंटों बाद ट्रंप ने घोषणा की कि भारत 500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदेगा और अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ जीरो कर देगा।

हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने समझौते की पुष्टि तो की, लेकिन ट्रंप के 'जीरो टैरिफ' वाले दावे पर कोई टिप्पणी नहीं की। जब गोर से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने चतुराई से जवाब दिया- मैं इसे व्यापार वार्ताकारों पर छोड़ दूंगा। राजदूतों के पोर्टफोलियो में हमेशा व्यापार सौदे की बारीकियां नहीं होतीं। लेकिन कुल मिलाकर, यह अविश्वसनीय खबर है... अमेरिका व्यापार के लिए खुला है। अभी बहुत कुछ अच्छा होना बाकी है। गोर ने अपने बॉस के अंदाज में ही 'कैपिटल लेटर्स' का इस्तेमाल करते हुए अपनी खुशी जाहिर की और कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों में असीमित संभावनाएं हैं।

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