What is Bab al-Mandeb Strait? Why called Gate of Tears Iranian plan to choke off every last drop of oil amid war क्या है बाब अल-मंडेब स्ट्रेट? क्यों कहलाता है आंसुओं का द्वार; बूंद-बूंद तेल को तरसाने का ईरानी प्लान क्या, Explainer Hindi News - Hindustan
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क्या है बाब अल-मंडेब स्ट्रेट? क्यों कहलाता है आंसुओं का द्वार; बूंद-बूंद तेल को तरसाने का ईरानी प्लान क्या

Bab al-Mandeb Strait: अरबी में ‘बाब अल-मंडेब’ का अर्थ ‘आंसुओं का द्वार’ होता है। यह संकरा समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह यमन (जहां ईरान समर्थित हूती सक्रिय हैं) और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र के बीच स्थित है।

Thu, 26 March 2026 06:46 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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क्या है बाब अल-मंडेब स्ट्रेट? क्यों कहलाता है आंसुओं का द्वार; बूंद-बूंद तेल को तरसाने का ईरानी प्लान क्या

Bab al-Mandeb Strait: ईरान युद्ध का आज (गुरुवार, 26 मार्च को) 27वां दिन है। फिलहाल इस जंग के थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट को पहले से ही अपना हथियार बना चुका ईरान अब एक और अहम समुद्री मार्ग को बाधित करने की रणनीति पर जोर-शोर से काम कर रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजरायल ने उसके द्वीपों, खासतौर पर खार्ग द्वीप, पर हमला किया, तो वह बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को बंद कर सकता है। फारस की खाड़ी में ईरान के 30 से ज्यादा द्वीप हैं। तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के एक सैन्य सूत्र ने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी क्षेत्र या उसके द्वीपों पर हमला होता है, तो वह बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में नया मोर्चा खोल सकता है। इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

क्या है बाब अल-मंडेब स्ट्रेट?

बाब अल-मंडेब स्ट्रेट लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जो आगे स्वेज नहर की ओर जाता है। दुनिया भर में समुद्र के रास्ते भेजे जाने वाले तेल का लगभग 12 फीसदी हिस्सा लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले इसी जलमार्ग से होकर गुज़रता है, जिससे यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शिपिंग मार्ग बन जाता है। इस जलमार्ग में यह स्ट्रेट रणनीतिक रूप से काफी अहम है। यह यमन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, जहाँ ईरान समर्थित हूती गुट का ठिकाना है।

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क्यों कहा जाता है आंसुओं का द्वार?

यह उत्तर-पूर्व में अरब प्रायद्वीप पर स्थित यमन को दक्षिण-पश्चिम में अफ्रीकी देशों जिबूती और इरिट्रिया से अलग करता है। इसके साथ ही यह एशिया और अफ्रीका महाद्वीपों के बीच स्थित एक संकरा और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य (Strait) है। इसे अरबी भाषा में "दुख का द्वार" या "आंसुओं का द्वार" (Gate of Tears) भी कहा जाता है। यह स्ट्रेट केवल 26-29 किलोमीटर चौड़ा है, जो अपनी चंचल समुद्री धाराओं, छिछली चट्टानों और तेज हवाओं के लिए जाना जाता है, जिससे पुराने समय में बहुत से जहाज यहाँ डूब जाते थे। इसीलिए इसे 'दुख का द्वार' (Gate of Tears) कहा जाता है। अरबी में 'बाब' का अर्थ 'द्वार' और 'मंडेब' का अर्थ 'विलाप' या 'दुख' है।

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एक जोखिम भरा मार्ग

पौराणिक मान्यताओं और एक अरबी किंवदंती के अनुसार, यह नाम उस समय की याद दिलाता है जब एक भयंकर भूकंप ने एशिया और अफ्रीका महाद्वीप को अलग किया था और बड़ी संख्या में लोग इसमें डूब गए थे। मौजूदा समय में, यमन के पास होने के कारण, हूती विद्रोहियों द्वारा समुद्री जहाजों पर हमले और भू-राजनीतिक तनाव ने इसे फिर से एक जोखिम भरा मार्ग बना दिया है। इस मार्ग से लगभग 10 प्रतिशत तेल और LNG गुजरता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर

अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट की ही तरह बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को बंद किया या उस पर पहरा लगाया तो इसका पूरी दुनिया पर बुरा असर पड़ सकता है क्योंकि वैसी स्थिति में जहाजों को अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा, जिससे सामानों की डिलीवरी में 15-20 दिन की देरी और लागत में भारी बढ़ोतरी होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक अल-मंडेब स्ट्रेट बंद होने की सूरत में दुनिया की 30 फीसदी से ज्यादा तेल-गैस सप्लाई पर असर पड़ सकता है। यानी पूरी दुनिया बूंद-बूंद तेल को तरस सकती है। इससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। बड़ी बात यह है कि बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के करीब पहले ही ईरान समर्थित हूती विद्रोही कई बार व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाते रहे हैं।

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