War meant to break Iran could leave Tehran stronger Experts warns US Israel gulf nations risk may increase ईरान को कमजोर करने की बजाय ताकतवर बना रहा युद्ध? कैसे US को उल्टा पड़ सकता है दांव, Explainer Hindi News - Hindustan
More

ईरान को कमजोर करने की बजाय ताकतवर बना रहा युद्ध? कैसे US को उल्टा पड़ सकता है दांव

जानकारों के मुताबिक अमेरिका और इजरायल ने ईरान की प्रतिक्रिया भांपने में बड़ी गलती की। जंग के शुरुआती दौर में अली खामेनेई की हत्या को निर्णायक कदम माना गया था, लेकिन इसके उलट युद्ध और भड़कता गया।

Thu, 2 April 2026 11:07 AMJagriti Kumari रॉयटर्स, दुबई
share
ईरान को कमजोर करने की बजाय ताकतवर बना रहा युद्ध? कैसे US को उल्टा पड़ सकता है दांव

US-Iran War: जानकारों का कहना है कि ईरान युद्ध का दांव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उल्टा पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को कमजोर करने के इरादे से शुरू की गई जंग, ईरान को और मजबूत बना देगी। बिना समझौता जंग खत्म होने से ईरान और मजबूत होकर उभर सकता है, जबकि खाड़ी देशों पर इस जंग का बोझ बढ़ जाएगा। इससे मिडिल ईस्ट में एनर्जी सप्लाई और तेल-गैस बाजार पर ईरान का दबदबा भी बढ़ सकता है।

युद्ध में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्ते को बंद करने की ईरान की क्षमता ने पहले ही ग्लोबल एनर्जी मार्केट को हिला दिया है। अब जंग शुरू हुए एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल के लगातार हमलों के बावजूद भी ईरान ने अपनी स्थिति बनाए रखी है आगे भी ऐसा ही होने की संभावना है। ऐसे में ईरान की ताकत और बढ़ सकती है।

क्या कह रहे जानकार?

दुबई के बीहुथ रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर मोहम्मद बहारून का कहना है कि जंग का बिना ठोस नतीजे के खत्म होना सबसे बड़ी चिंता है। उनका कहना है कि अमेरिका जंग रोक सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ईरान भी रुक जाएगा। जब तक खाड़ी में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, तब तक ईरान का खतरा बना रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान इस जंग से बिना हारे निकलता है, तो वह शिपिंग रूट्स, एनर्जी सप्लाई और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करने की ज्यादा ताकत हासिल कर सकता है। इससे खाड़ी देशों को आर्थिक और रणनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:ट्रंप ने ईरान के तेल पर क्यों नहीं किया अटैक, खुद किया खुलासा; अल्टीमेटम भी दिया

ईरान की प्रतिक्रिया को कमतर आंका

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने ईरान की प्रतिक्रिया को लेकर बड़ी गलती की। जंग के शुरुआती दौर में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या को निर्णायक कदम माना गया था, लेकिन इसके उलट युद्ध और भड़क गया। उनकी जगह उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने ली और इस घटना ने ईरान में प्रतिरोध और बदले की भावना को और मजबूत कर दिया।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:ईरान ने मिसाइलों से दिया ट्रंप की ‘आखिरी वार्निंग’ का जवाब, इजरायल को दहलाया

मिडिल ईस्ट के जानकार फवाज गेर्गेस के अनुसार, इस कदम ने राजनीतिक संघर्ष को धार्मिक और सभ्यतागत टकराव में बदल दिया। इससे ईरान के नेतृत्व को अंदरूनी समर्थन और मजबूत मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की व्यवस्था कई स्तरों पर काम करती है और लंबे समय से दबाव झेलने के बावजूद टिके रहने की क्षमता रखती है।

क्या रही है ईरान की रणनीति?

ईरान ने इस जंग में अपनी रणनीति के तहत सीधे मुकाबले के बजाय आर्थिक दबाव बनाने पर जोर दिया है। एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही ठप करके उसने तेल की कीमतों को बढ़ाया जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का मकसद युद्ध जीतना नहीं, बल्कि विरोधी पक्ष को आर्थिक रूप से थका देना है। अगर जंग आर्थिक रूप से असहनीय हो जाती है, तो केवल टिके रहना ही जीत माना जाएगा।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:US मांगे सीजफायर! 'बहुत' से 'कुछ' पर आए ट्रंप, ईरान मुद्दे पर वेंस को किया आगे

और आक्रामक हो जाएगा ईरान?

अगर अमेरिका बिना सुरक्षा गारंटी के पीछे हटता है, तो ईरान भविष्य में और आक्रामक हो सकता है। उसके पास दुनिया भर में फैले नेटवर्क हैं, जिनके जरिए वह अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों को निशाना बना सकता है। विशेषज्ञ मैग्नस रैनस्टॉर्प के अनुसार, ईरान के पास अभी भी बड़ी क्षमता है और उसने अभी पूरी ताकत नहीं दिखाई है। ऐसे में अगर अमेरिका पीछे हटता है, तो ईरान इसे अपनी जीत मानेगा और क्षेत्र में पहले से ज्यादा खतरनाक बनकर उभरेगा।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।