कहां से मिलती है भारत को सबसे ज्यादा LPG, अब किनसे दिख रही राहत की उम्मीद
अमेरिका और नॉर्वे जैसे देशों से भी अब गैस की सप्लाई ली जा रही है। अब तक भारत खाड़ी के देशों पर ही इसके लिए निर्भर रहा है। भारत के लिए फिलहाल गैस का संकट इसलिए बड़ा है क्योंकि बीते कुछ सालों में एलपीजी के ग्राहकों की संख्या में करोड़ों का इजाफा हुआ है।

भारत में एलपीजी गैस की किल्लत की खबरें तमाम शहरों से आ रही हैं। कहीं कतारों की तस्वीरें हैं तो कहीं रेस्तरां आदि बंद करने पड़े हैं। हालात यह हैं कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग होने में दिक्कत और किसी तरह बुक कर ले रहे हैं तो सप्लाई में देरी की शिकायतें भी हैं। सरकार का कहना है कि हमने इस संकट से निपटने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। अमेरिका और नॉर्वे जैसे देशों से भी अब गैस की सप्लाई ली जा रही है। अब तक भारत खाड़ी के देशों पर ही इसके लिए निर्भर रहा है। भारत के लिए फिलहाल गैस का संकट इसलिए बड़ा है क्योंकि बीते कुछ सालों में एलपीजी के ग्राहकों की संख्या में करोड़ों का इजाफा हुआ है।
देश के करीब 98 फीसदी परिवारों तक अब एलपीजी की पहुंच है। इसके अतिरिक्त औद्योगिक विकास तेज होने के कारण भी गैस की जरूरत मैन्युफैक्चरिंग समेत तमाम कारोबारों में पड़ती है। भारत की जरूरत लगातार बढ़ी है, लेकिन घरेलू उत्पादन में इजाफा नहीं दिखता। ऐसी स्थिति में आयात पर निर्भरता बहुत अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत अपनी एलपीजी खपत का 60 फीसदी हिस्सा आयात ही करता है। इसमें से 90 फीसदी आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता है, जो ईरान में चल रही जंग के चलते प्रभावित है। इस संकट के बीच सरकार ने सभी रिफाइनरीज को आदेश दिया है कि वे एलपीजी के उत्पादन में 25 फीसदी का इजाफा कर दें।
अब भारत के आयात के पूल की बात करें तो इसमें खाड़ी देश शामिल हैं। भारत एलएनजी और एलपीजी का जो आयात करता है, उसका मुख्य हिस्सा सऊदी अरब, कतर, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया, ओमान और अंगोला से आता है। यहां से आने वाली 90 फीसदी सप्लाई तो उसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आती है, जिस पर ईरान की ओर से लगातार हमले जारी हैं। इसके अलावा एक संकट यह भी है कि कतर, सऊदी अरब और यूएई में भी ईरान हमले कर रहा है। इसके चलते वहां उत्पादन ही कम हो रहा है। इससे स्थिति और विकट हो जाती है।
ऑस्ट्रेलिया से आने वाली गैस का रूट अलग, राहत की उम्मीद
बीते कुछ सालों में अमेरिका तेजी से भारत का पार्टनर बना है। गैस का आयात हम वहां से बढ़ा सकते हैं, लेकिन यह तत्काल संभव नहीं है और उसका रूट भी वही है। इस बीच बड़ी राहत की उम्मीद ऑस्ट्रेलिया भी बन सकता है, जिस पर सरकार कोशिश कर रही है। ऑस्ट्रेलिया से आने वाली सप्लाई एन्नोर और धमरा से आती है। एन्नोर चेन्नै के पास स्थित बंदरगाह है तो धमरा ओडिशा में स्थित है। इस तरह यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वाले संकट से परे है। इस तरह थोड़ी राहत मिल सकती है। इसके अलावा भविष्य में भी गैस की सप्लाई में यह विविधता काम आएगी। ऊर्जा संसाधनों के लिए कुछ निश्चित देशों पर ही अधिकतम निर्भरता खतरनाक साबित हो सकती है।
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