How Iran remains on front foot despite losing its top leadership in the war one month युद्ध में टॉप लीडरशिप को गंवाकर भी कैसे फ्रंटफुट पर है ईरान, कहां खड़े ट्रंप; महीनेभर का लेखा-जोखा, Explainer Hindi News - Hindustan
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युद्ध में टॉप लीडरशिप को गंवाकर भी कैसे फ्रंटफुट पर है ईरान, कहां खड़े ट्रंप; महीनेभर का लेखा-जोखा

लीडरशिप के विनाश के बाद भी ईरान की रणनीति ने उसे मजबूत बनाए रखा है। ईरान ने इजरायल पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे हैं, जिनमें कुछ क्लस्टर हथियार भी शामिल रहे जो तेल अवीव और अन्य इलाकों में नुकसान पहुंचा चुके हैं।

Sat, 28 March 2026 04:32 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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युद्ध में टॉप लीडरशिप को गंवाकर भी कैसे फ्रंटफुट पर है ईरान, कहां खड़े ट्रंप; महीनेभर का लेखा-जोखा

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों से शुरू हुए ईरान युद्ध को आज ठीक एक महीना हो गया है। अटैक के शुरुआती घंटों में ही ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत आईआरजीसी के कई टॉप कमांडर और सीनियर लीडरशिप मार दिए गए। इसके बाद मोहम्मद खामेनेई जैसे नए नेताओं की नियुक्ति भी हमलों की चपेट में आई। लेकिन इन भारी नुकसानों के बावजूद ईरान आज भी फ्रंटफुट पर नजर आ रहा है। तेहरान की ओर से मिसाइल हमले जारी हैं, सेनाएं सक्रिय हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाए हुए है।

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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लीडरशिप के विनाश के बाद भी ईरान की रणनीति ने उसे मजबूत बनाए रखा है। ईरान ने इजरायल पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे हैं, जिनमें कुछ क्लस्टर हथियार भी शामिल रहे जो तेल अवीव और अन्य इलाकों में नुकसान पहुंचा चुके हैं। लेबनान में हिजबुल्लाह ने हमलों की गति बढ़ा दी है जबकि यमन के हूती विद्रोहियों ने भी हाल ही में मोर्चा संभाला है। सबसे बड़ा हथियार रहा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है, जो कि दुनिया के 20% तेल गुजरने वाला रास्ता है।

ईरान की क्या है रणनीति

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का प्रभावी नियंत्रण या ब्लॉकेज ने वैश्विक तेल कीमतें बढ़ा दी हैं और आपूर्ति बाधित हुई है। यह आर्थिक रणनीति ईरान को सैन्य कमजोरी के बावजूद लाभ दे रही है। दूसरी ओर, इजरायल और अमेरिका ने ईरान के मिसाइल प्रोग्राम, न्यूक्लियर साइट्स, हथियार फैक्टरियों और एयर डिफेंस पर भारी हमले किए। कई सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया गया, ईरान की क्षमता काफी हद तक क्षतिग्रस्त हुई। फिर भी ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की हिम्मत नहीं टूटी है।

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ईरान ने दिखाया कि मजबूत कमांड और सटीक युद्धकौशल से वह लंबे समय तक टिक सकता है। एक महीने में हजारों मौतें हुईं लेकिन तेहरान का शासन ढहने के बजाय लड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध में कहीं ना कहीं बैकफुट पर दिख रहे हैं। शुरुआत में उन्होंने 'रिजीम चेंज' का संकेत दिया और ईरान को पूरी तरह तबाह करने का दावा किया। लेकिन अब वे बार-बार होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की डेडलाइन बढ़ा रहे हैं और ईरान के एनर्जी प्लांट्स पर हमले टाल रहे हैं।

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आने वाले दिनों में क्या होगा

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को 10 दिन की मोहलत दी है। ट्रंप बातचीत बहुत अच्छी चलने का दावा कर रहे हैं जबकि ईरान प्रस्ताव ठुकरा रहा है या शर्तें लगा रहा है। अमेरिका में आर्थिक नुकसान, शेयर बाजार गिरावट और युद्ध को जल्द खत्म करने की मांग ट्रंप को मजबूर कर रही है। एक महीने के लेखा-जोखे में ईरान का नुकसान तो उभरकर सामने आया है, साथ ही ट्रंप की रणनीति में लचक दिख रहा है। युद्ध अभी निर्णायक नहीं पहुंचा है। ईरान फिलहाल सैन्य रूप से कमजोर लेकिन रणनीतिक रूप से मजबूत नजर आता है। आने वाले दिनों में युद्ध में तेजी या बातचीत से समाधान दोनों संभव हैं।

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