Zeehale Muskin Makun ba Ranjish song written by gulzar, was amir khusro's ghazal जिहाल-ए-मिस्कीं…आप जानते हैं किस गीतकार ने लिखा था ये गाना? फारसी गजल को बना दिया हिंदी गीत, Bollywood Hindi News - Hindustan
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जिहाल-ए-मिस्कीं…आप जानते हैं किस गीतकार ने लिखा था ये गाना? फारसी गजल को बना दिया हिंदी गीत

फिल्म गुलामी का गाना ‘जिहाल-ए-मिस्कीं मकुन बरंजिश’ कई बार सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं ये गाना असल में कहा से आया और किसने लिखा था? फारसी गजल को इस गीतकार ने हिंदी गाना बना दिया था।

Wed, 27 May 2026 06:12 PMUsha Shrivas लाइव हिन्दुस्तान
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जिहाल-ए-मिस्कीं…आप जानते हैं किस गीतकार ने लिखा था ये गाना? फारसी गजल को बना दिया हिंदी गीत

1985 में एक फिल्म आई थी गुलामी। इस फिल्म में धर्मेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, नसीरुद्दीन शाह, कुलभूषण खरबंदा, स्मिता पाटिल जैसे एक्टर्स नजर आए थे। बॉक्स ऑफिस पर धमाका करने वाली ये उस साल की चौथी सबसे बड़ी फिल्म साबित हुई। फिल्म की कहानी और एक्टर्स की परफॉरमेंस को ऑडियंस ने खूब पसंद किया था। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चे फिल्म के एक गाने के हुए। फिल्म में एक गाना था ‘जिहाल-ए-मिस्कीं मकुन बरंजिश’, इस गाने के चर्चे 40 साल बाद तक हो रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं ये गाना लिखा किसने था?

इस गीतकार ने लिखा था ये गाना

फिल्म गुलामी का एक सीन है जिसमें कड़ी धूप में मिथुन और अनीता राज को बस के ऊपर देखा जाता है। साथ ही गाना चलता है ‘जिहाल-ए-मिस्कीं मकुन बरंजिश’ ब-हाल-ए-हिजरां बेचारा दिल है सुनाई देती है जिसकी धड़कन, तुम्हारा दिल या हमारा दिल है’। कई सालों तक लोग इस गाने का मतालबा खोजते रहे। असल में ये एक फारसी भाषा में लिखी हुई गजल की एक लाइन है जिसे अमीर खुसरो ने लिखा था। लेकिन गुलजार ने अमीर खुसरो की एक लाइन पर हिंदी के सरल शब्दों का इस्तेमाल कर पूरा एक गाना बना दिया। इस गाने को लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी ने कंपोज़ किया था। असल में गाने की इस लाइन का मतलब होता है कि मुझ गरीब और बेसहारा के दिल पर तरस खाओ। इस गाने को लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की आवाज कहे जाने वाले सिंगर शब्बीर कुमार ने गाया था।

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अमीर खुसरो की गजल

अमीर खुसरो ने फारसी और बृज भाषा को मिलकर ये गजल बनाई थी=

‘ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल,

दुराये नैना बनाये बतियां

कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऐ जान

न लेहो काहे लगाये छतियां’

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हिंदी गाना बना दिया

अमीर खुसरो की इस गजल को जब गुलजार ने सुना तो इसे ऐसे अपने गाने में इस्तेमाल कर लिया। मिथुन पर फिल्माया ये गाना जबरदस्त हिट हुआ था। फिल्म के म्यूजिक ने कमाल कर दिया था। आज भी ये फिल्म इस गाने की वजह से याद की जाती है। फिल्म गुलामी की बात करें तो ये बॉर्डर बनाने वाले जेपी दत्ता की पहली डायरेक्टोरियल फिल्म थी। फिल्म में कुल 5 गाने रखे गए थे जिनके बोल गुलजार ने लिखे और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी कंपोजर थे। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की थी।

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गुलजार की फिल्में

गुलजार ने अपने उसी दौर में कई कई फिल्में लिखी जिसमें से इजाजत, अर्थ, कोशिश, मौसम, माचिस, अंगूर जैसी फिल्में बनाई। इन सभी फिल्मों के गानों ने एक अलग छाप छोड़ी थी। गुलजार ने इंडस्ट्री को एक अलग तरह का सिनेमा दिया। उनके लिखे गीतों में सुकून झलकता है। आज भी गुलजार की बनाई फिल्में और लिखे गीत कमाल कर रहे हैं।

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