Rajpal Yadav lawyer bahskar Upadhyay tells madhav Agarwal was annoyed because could share stage with Amitabh Bachchan अमिताभ बच्चन की वजह से राजपाल यादव से चिढ़े थे लोन देने वाले माधव अग्रवाल, वकील ने बताई कहानी, Bollywood Hindi News - Hindustan
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अमिताभ बच्चन की वजह से राजपाल यादव से चिढ़े थे लोन देने वाले माधव अग्रवाल, वकील ने बताई कहानी

राजपाल यादव का लोन वाला केस चर्चा में है। दोनों पक्ष मीडिया में अपनी-अपनी बात रख रहे हैं। अब राजपाल के वकील का आरोप है कि शिकायतकर्ता माधव गोपाल अग्रवाल इस वजह से चिढ़ गए थे क्योंकि उन्हें अमिताभ बच्चन के पास स्टेज पर बैठने को नहीं मिला।

Fri, 20 Feb 2026 01:20 PMKajal Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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अमिताभ बच्चन की वजह से राजपाल यादव से चिढ़े थे लोन देने वाले माधव अग्रवाल, वकील ने बताई कहानी

राजपाल यादव अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर हैं। उनके चेक बाउंस और लोन ना चुकाने का केस अभी कोर्ट में है। यह केस लोगों की नजरों में तब चढ़ा जब राजपाल का जेल जाने से पहले एक इमोशनल वीडियो वायरल हुआ। इस केस से जुड़े कई अपडेट्स अब सामने आ रहे हैं। अब राजपाल के वकील भास्कर उपाध्याय ने केस से जुड़ीं अपने पक्ष की बातें रखी हैं। उनका आरोप है कि राजपाल यादव को लोन देने वाले माधव गोपाल अग्रवाल इस बात से चिढ़ गए थे कि उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ बैठने को नहीं मिला।

बिग बी की वजह से निकाली खुन्नस?

राजपाल यादव के वकील भास्कर ने एचटी सिटी को डिटेल में इस केस के बारे में बताया। भास्कर बोले, 'सितंबर में अमिताभ बच्चन मूवी लॉन्च के लिए आए और माधव अग्रवाल उनके साथ स्टेज शेयर करना चाहते थे। राजपाल की टीम ने मना कर दिया क्योंकि अमिताभ बच्चन ने आने के बदले में कुछ भी नहीं लिया था। माधव अग्रवाल इसी बात पर चिढ़ गए। वह सितंबर 2012 में दिल्ली हाईकोर्ट चले गए और एग्रीमेंट के आधार पर बकाया चुकाने तक फिल्म पर स्टे की मांग रखी। केस दिसंबर 2012 तक खिंचा जब पहला 60,60,350 रुपये का चेक डिपॉजिट किया गया है जिस पर बैंक से पैसे रिलीज हुए।'

वकील ने बताई केस की डिटेल

वकील ने बताया किया कि आखिरकार माधव ने फिल्म से स्टे हटाने का अनुरोध करते हुए एक हलफनामा जमा किया और दोनों पक्षों ने 2013 में एक सहमति समझौते पर दस्तखत किए, जिसके मुताबिक पिछले सभी समझौते अमान्य माने जाने थे। 2016 में एक नया समझौता बना और कानून ये दोनों पार्टीज की तरफ से बदला नहीं जा सकता था। उसके मुताबिक, 10.40 करोड़ का अमाउंट बाकी था। शिकायतकर्ता ने उस समझौते पर साइन किए थे कि अगर उनको ये पैसा दिया जाता है तो पुराने एग्रीमेंट रिवाइव नहीं किए जाएंगे। हाई कोर्ट ने भी कहा कि इस पैसे की रिकवरी कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही की जानी चाहिए।

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राजपाल ने गिरवीं रखनी चाहिए प्रॉपर्टी

2016 में वसूली की याचिका दी गई थी और शिकायतकर्ता को 1.90 करोड़ रुपये दे दिए गए थे। बाकी पैसे के लिए एक और गारंटर मिस्टर अनंत दत्ताराम आ गए। भास्कर ने बताया कि राजपाल यादव ने माधव अग्रवाल को अपनी 15 करोड़ की प्रॉपर्टी जमानत के तौर पर रखने के लिए कहा और बाकी अमाउंट एक महीने में वापस लौटाने की इजाजत मांगी। शिकायकर्ता ने यह ऑफर ठुकरा दिया और राजपाल को जेल भेजने की ठान ली।

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माधव अग्रवाल दोबारा एक्टिव किए चेक

हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान एक अजीब स्थिति सामने आई। भास्कर ने बताया, 'जब एक्जीक्यूशन केस चल रहा था, तभी शिकायतकर्ता ने तीसरे सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट के तहत दिए गए चेक दोबारा ऐक्टिव कर दिए, जिन्हें पिछले सहमति समझौते के बाद निरस्त (नल) माना जाना था। मार्च 2018 में उसी पुराने समझौते के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने राजपालजी को दोषी ठहराते हुए 11.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। इसके बाद नवंबर 2018 में एक्जीक्यूशन कोर्ट ने उसी कॉज ऑफ ऐक्शन के आधार पर राजपालजी को तीन महीने की सजा सुनाई। जबकि एक ही मामले में दोनों प्रक्रियाएं पैरलल नहीं चल सकतीं।'

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राजपाल ने 2019 में दी थी चुनौती

राजपाल की टीम ने वर्ष 2019 में इस आदेश को रिवीजन कोर्ट में चुनौती दी। हालांकि, उस समय उनकी ओर से नए वकील की नियुक्ति की गई, जिनसे एक बड़ी चूक हो गई। भास्कर बताते हैं, 'नए जज ने कहा कि उन्हें मामले में कोई दम नजर नहीं आता और राजपालजी के वकील ने अदालत में यह स्वीकार किया कि यदि मध्यस्थता का अवसर दिया जाए तो वह राशि चुकाने को तैयार हैं। अदालत ने अपने आदेश में इस बात का उल्लेख भी किया।'

राजपाल की तरफ से कोर्ट से अनुरोध

भास्कर आगे बताते हैं, इसी वजह से मामला अब तक चल रहा है। ताजा घटनाक्रम में उनकी ओर से अदालत से अनुरोध किया गया है कि उनकी दलीलें भी सुनी जाएं और मामले का निपटारा मेरिट के आधार पर किया जाए।

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