पाकिस्तान के स्कूल में कभी गाया जाता था लता मंगेशकर का 69 साल पहले बना ये गाना, बोल सुनकर रो पड़ेगा दिल, IMDb रेटिंग 8.4
लता के गानों के दीवाने सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि सरहद पार पाकिस्तान में भी हैं। उनके कई गानों को आज भी पाकिस्तान में काफी पसंद किया जाता है। लता मंगेशकर ने रोमांटिक से लेकर इमोशनल और देशभक्ति जैसे कई गाने गाए थे, जिसे देश और विदेश के लोग बेहद पसंद करते हैं।

बॉलीवुड की स्वर कोकिला लता मंगेशकर आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन अपने अनमोल गानों की वजह से हमेशा ही फैंस के दिलों में जिंदा रहेंगी। लता ने अपने फिल्मी करियर में कई ब्लॉकबस्टर गाने दिए हैं। उन्होंने न सिर्फ हिंदी बल्कि कई अन्य भाषाओं में भी गाने गाए हैं। उनके गानों के दीवाने सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि सरहद पार पाकिस्तान में भी हैं। उनके कई गानों को आज भी पाकिस्तान में काफी पसंद किया जाता है। लता मंगेशकर ने रोमांटिक से लेकर इमोशनल और देशभक्ति जैसे कई गाने गाए थे, जिसे देश और विदेश के लोग बेहद पसंद करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं सिंगर का एक गाना पाकिस्तान के स्कूलों में भी बजाया गया था। इस गाने को सुनकर आज भी लोगों के आंखों में आंसू भी आ जाते हैं। आइए जानते हैं कौन सा है वो गाना?
पाकिस्तान के स्कूल में बजाया गया था लता का ये गाना
लता मंगेशकर के जिस गाने का हम बात कर रहे हैं। वो गाना 1957 में आई फिल्म 'दो आंखें बारह हाथ' का है। ये गाना 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम' है। ये प्रार्थना गीत को न सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी इतना प्रिय है कि एक बार इसे वहां के एक स्कूल में एंथम के तौर पर बजाया गया था। आज भी इसके बोल सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम' गाने को भरत व्यास ने लिखा है और वसंत देसाई ने संगीत दिया है। वहीं, गाने को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से सजाया।
क्या है इस गाने का सार
'ऐ मालिक तेरे बंदे हम' गाने की बात करें तो इसमें निराशा और अंधकार के बीच आशा और नेक रास्ते पर चलने की बात बताई जा रही है। यही नहीं ये भी बताया कि कितनी भी मुश्किलें हमारे रास्ते में क्यों न आएं हमें नेकी और सच्चाई का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए। यह गीत किसी एक धर्म या देश तक सीमित नहीं है बल्कि यह मानवता को दिखाता है। आज भी कई भारतीय स्कूल में यह गाना प्रार्थना के तौर पर गाया जाता है।
लता नहीं आशा गाने वाली थी ये गाना
इसके साथ ही हम आपको बता दें क 'ऐ मेरे वतन के लोगों' इस गाने के पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा है। इस गाने की पहली पसंद लता मंगेशकर नहीं, बल्कि आशा भोसले थीं। इस गीत की रिहर्सल आशा से करवाई गई थी। लेकिन जब लता ने इस गाने के सुना तो उन्होंने इस गाने को गाने की अपनी इच्छा जाहिर की। हालांकि, इस पर आशा ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई। यह गीत इतिहास बना।
पहली बार गाना सुनकर रो पड़ीं थीं लता
ये बात शायद ही आपको पता हो कि जब इस गाने को प्रदीप जी ने गुनगुनाया तो उसे सुनकर लता मंगेशकर रो पड़ी थीं। बस फिर क्या था उन्होंने तुरंत इस गाने के लिए हां कर दी थी। लेकिन उन्होंने तब एक ही शर्त रखी कि जब इस गाने का रिहर्सल होगा तो प्रदीप को खुद मौजूद रहना होगा और वो इसके लिए मान गए। फिर जो कुछ हुआ, वो इतिहास बन गया।
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