Explainer Amid Dhurandhar 2 Release Know how and who decided movie ticket price ‘धुरंधर 2’ की टिकट की प्राइज पहुंची 3100 रुपये तक, आखिर कौन तय करता है मूवी टिकट की कीमतें?, Bollywood Hindi News - Hindustan
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‘धुरंधर 2’ की टिकट की प्राइज पहुंची 3100 रुपये तक, आखिर कौन तय करता है मूवी टिकट की कीमतें?

Explainer: कभी सोचा है कि फिल्मों की टिकटों की कीमतें कौन तय करता है? नहीं, चलिए हम आपको बताते हैं कि ये कैसे होता है और कौन करता है।

Wed, 11 March 2026 01:24 PMVartika Tolani लाइव हिन्दुस्तान
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‘धुरंधर 2’ की टिकट की प्राइज पहुंची 3100 रुपये तक, आखिर कौन तय करता है मूवी टिकट की कीमतें?

'धुरंधर 2' की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। मुंबई के कुछ सिनेमाघरों में इसकी टिक 3100 रुपये में बिक रही हैं, वहीं दिल्ली में इसकी कीमत 2400 है। क्या मेरी ही तरह आपके मन में भी ये सवाल आ रहा है कि ये टिकट की आखिर तय कौन करता है? हां, तो चलिए इस आर्टिकल के जरिए मैं आपको बताती हूं कि फिल्म की टिकट की कीमत कौन तय करता है।

नॉर्थ-साउथ

साउथ में सरकार का रोल टिकट की कीमत तय करने में बड़ा होता है। तमिलनाडु जैसे राज्यों में टिकट की कीमतों पर एक कैप यानी अधिकतम सीमा लगी होती है, जिससे कीमतें एक तय सीमा से ऊपर नहीं जाती हैं। वहीं नॉर्थ में, चंडीगढ़ जैसे कुछ हिस्सों को छोड़कर, ज्यादातर राज्यों में एग्जीबिटर्स/ थिएटर के मालिक फिल्म की टिकट की कीमत तय करते हैं।

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मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन का अंतर

मल्टीप्लेक्स में लगी फिल्मों की टिकटों की कीमतें तय करने का एक सेट पैटर्न है। PVR या INOX जैसी बड़ी चेन आपस में और फिल्म के प्रोड्यूसर/स्टूडियो के साथ चर्चा करती हैं। वे फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रीडिक्शन के आधार पर कीमत तय करते हैं। वहीं सिंगल स्क्रीन की बात करें तो यहां थिएटर्स के मालिक, फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर के साथ बैठकर रेट तय करते हैं। अगर फिल्म बड़े बजट की है, तो डिस्ट्रीब्यूटर का पलड़ा भारी रहता है।

समय और दिन का असर

इन सबके अलावा, शहर के आधार पर भी कीमतें तय होती हैं। वीकेंड पर रेट ज्यादा होते हैं, जबकि वीक डेज पर दाम कम कर दिए जाते हैं। सुबह के शो सस्ते और शाम के महंगे होते हैं। अगर फिल्म में बड़ा सुपरस्टार है और एडवांस बुकिंग जबरदस्त है तो कीमतें बढ़ा दी जाती हैं।

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प्रोड्यूसर्स की मनमानी

बड़े प्रोड्यूसर्स चाहते हैं कि उन्होंने फिल्म में जितना पैसा लगाया है उसकी रिकवरी जल्द से जल्द हो इसलिए वे थिएटर के मालिक पर टिकट रेट बढ़ाने का दबाव डालते हैं। थिएटर के मालिक टिकट की कीमत तय करने से पहले ये भी देखते हैं कि कहीं दर्शक महंगे टिकट की वजह से थिएटर आना ही न छोड़ दें।

थिएटर का खर्च और सुविधाएं

थिएटर मालिक का कहना है कि अगर उन्होंने करोड़ों रुपये साउंड सिस्टम, सीटों और डेकोरेशन पर खर्च किए हैं तो वे उसे वसूलने के लिए टिकट की कीमतें ऊंची रखते हैं। इसके अलावा, थिएटर मालिकों के लिए असली कमाई का जरिया टिकट नहीं, बल्कि खाने-पीने का सामान होता है।

सार

टिकट की कीमत तय करने में मुख्य रूप से थिएटर के मालिक, प्रोड्यूसर और डिस्ट्रीब्यूटर की आपसी सहमति होती है। इसमें फिल्म का बजट, स्टार कास्ट और दर्शकों की मांग सबसे बड़े कारक होते हैं।

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