Do you know Zindagi ka na toote lari lyricist Santosh Anand painful life son committed suicide jumping before train कहां गुम है बॉलीवुड में 100 से ज्यादा गाने लिखने वाला गीतकार? बेटे और बहू ने कर लिया था सुसाइड, Bollywood Hindi News - Hindustan
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कहां गुम है बॉलीवुड में 100 से ज्यादा गाने लिखने वाला गीतकार? बेटे और बहू ने कर लिया था सुसाइड

‘जिंदगी की न टूटे लड़ी’, ‘चना चोर गरम…’, ये सब गाने तो आपने बहुत बार सुने होंगे। पर आज हम आपको ये गाने लिखने वाले गीतकार के जीवन के बार में बता रहे हैं। इस गीतकार का जीवन बहुत ही मुश्किलों भरा रहा है। इस गीतकार के बेटे और बहू ने ट्रेन के सामने कूदकर सुसाइड कर लिया था। 

Sun, 24 May 2026 05:45 AMHarshita Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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कहां गुम है बॉलीवुड में 100 से ज्यादा गाने लिखने वाला गीतकार? बेटे और बहू ने कर लिया था सुसाइड

'एक प्यार का नगमा है', 'जिंदगी की न टूट लड़ी', 'चना जोर गरम...', जैसे सदाबहार गाने लिखने वाले गीतकार का जीवन बहुत मुश्किल भरा रहा है। उन्होंने बॉलीवुड की 30 फिल्मों में 100 से ज्यादा गाने लिखे, लेकिन एक वक्त आया जब वो भुला से दिए गए और आर्थिक तंगी में अपना जीवन जीने को मजबूर हुए। इस गीतकार का नाम है संतोष आनंद। संतोष आनंद एक बेहद शानदार गीतकार रहे हैं, लेकिन उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। साल 2015 में संतोष आनंद के जीवन में कुछ ऐसा घटा जो शायद वो अपनी पूरी जिंदगी नहीं भुला पाएंगे। संतोष आनंद के बेटे और बहू ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी।

संतोष आनंद का असली नाम क्या?

संतोष आनंद का जीवन शुरू से ही परेशानियों से भरा रहा। संतोष आनंद का असली नाम संतोष मिश्रा है, लेकिन जब संतोष एक मशहूर गीतकार बने तो उन्होंने अपने नाम से मिश्रा हटाकर आनंद लगा लिया। संतोष ने अपने नाम में आनंद भले ही लगा लिया हो, लेकिन इस गीतकार से खुशियां हमेशा ही दूर रहीं।

संतोष आनंद ने लिखे हैं 100 गाने

जवानी में संतोष आनंद का एक पैर चला गया। इसके बाद भी संतोष आनंद ने हौसला नहीं हारा और अपने जीवन में कामयाबी हासिल की। इस गीतकार को जिंदगी में शौहरत और नाम तो मिला, लेकिन इसी के साथ मिला जीवनभर का दर्द। आइए जानते हैं कैसे फिल्मी दुनिया में संतोष आनंद ने रखा कदम और 100 से ज्यादा गीत लिखने के बाद भी क्यों इन्हें आर्थिक तंगी झेलनी पड़ी।

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कैसे मिला फिल्मी दुनिया में कदम रखने का मौका?

संतोष आनंद का जन्म 5 मार्च 1929 को यूपी के बुलंदशहर में स्थित सिकंदराबाद में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से लाइब्रेरी साइंस की पढ़ाई की। इसके बाद वो दिल्ली में बतौर लाइब्रेरियन काम करने लगे। इसी के साथ उनकी दिलचस्पी कविताओं और शायरी में भी बढ़ने लगी। वो कवि सम्मेलनों में हिस्सा लेने लगे। ऐसे ही एक कार्यक्रम में संतोष ने हिस्सा लिया। उस कार्यक्रम में एक्टर मनोज कुमार भी पहुंचे थे। यहां मनोज कुमार ने संतोष आनंद को सुना और उनके मुरीद हो गए। मनोज कुमार के बुलावे पर ही संतोष मुंबई गए। यहीं से संतोष आनंद ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा।

इन फिल्मों में लिखे गाने

संतोष आनंद को पहला गाना लिखने का मौका भी मनोज कुमार नेही दिया। फिल्म पूरब और पश्चिम में संतोष आनंद का लिखा गाना पुरवा सुहानी आई रे इतना पसंद किया गया कि संतोष आनंद मनोज कुमार के पसंदीदा हो गए। इसके बाद संतोष आनंद ने मनोज कुमार के लिए कई और गाने लिखे। मनोज कुमार ने क्रांति, शोर, प्यासा सावन और प्रेम रोग जैसी फिल्मों में गाने लिखे।

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जब गिरने लगा संतोष आनंद का करियर ग्राफ

प्रेम रोग में गाने जब हिट हुए तो संतोष आनंद के करियर का ग्राफ ऊपर बढ़ना चाहिए था, लेकिन हुआ ठीक इसका उल्टा। उनका ग्राफ नीचे गिरने लगा। इसकी वजह थी कि उन्हें बड़े बजट की फिल्मों में गाने लिखने का मौका नहीं मिल रहा था। उन्हें ज्यादातर बी ग्रेड या छोटे बजट की फिल्मों में गाने लिखने के मौके मिल रहे थे। 1998 में आई फिल्म प्रेम अगन संतोष आनंद की आखिरी फिल्म थी जिसमें उन्होंने गाने लिखे।

प्रेम अगन के बाद फिल्मी दुनिया ने संतोष आनंद को पूरी तरह भुला दिया। जब बॉलीवुड में गाने के मौके मिलना बंद हुए तब संतोष आनंद दिल्ली वापस आ गए। दिल्ली आकर संतोष आनंद अपनी पत्नी के साथ अपनी बेटी शैलजा के घर रहने लगे। इस दौराव संतोष आनंद ने आर्थिक तंगी भी झेली। वो कवि सम्मेलनों और मुशायरों में जाकर पैसे कमाते थे। संतोष आनंद आज भी अपनी बेटी के साथ दिल्ली में ही रहते हैं। संतोष आनंद अपने इंस्टाग्राम पर अपने वीडियोज पोस्ट करते हैं।

जब संतोष आनंद के बेटे ने की आत्महत्या

दिल्ली में बेटी के पास रह रहे संतोष आनंद के पास 15 अक्टूबर, 2014 को मथुरा पुलिस का फोन आया। उन्हें बताया गया कि उनके बेटे संकल्प और बहू नंदिनी का एक्सिडेंट हो गया है। हालांकि, बाद में पता चला कि नंदिनी और संकल्प ने ट्रेन के आगे कूदकर सुसाइड किया था। संकल्प और नंदिनी की एक तीन साल की बेटी भी उनके साथ मौजूद थी, लेकिन उसे कुछ भी नहीं हुआ था। संकल्प और नंदिनी के शव के पास से 10 पन्नों का एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था।

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संकल्प आनंद गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस' में लेक्चरर थे। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में संस्थान के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों पर घोटाले के गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले की कई सालों तक जांच भी चली थी। संतोष आनंद और उनके परिवार को इस घटना ने सदमे में डाल दिया था।

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