do you know aa laut ke aaja mere meet zara samne to aa o chhaliye song bharat vyas wrote in memory of lost son लव सॉन्ग समझकर गाते हैं लोग, लेकिन बेटे से बिछड़ने के गम में पिता ने लिखा था ये गाना, लिरिक्स में छिपा है दर्द, Bollywood Hindi News - Hindustan
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लव सॉन्ग समझकर गाते हैं लोग, लेकिन बेटे से बिछड़ने के गम में पिता ने लिखा था ये गाना, लिरिक्स में छिपा है दर्द

वेदना और गीतों का पुराना नाता है। गहरे गीत लिखने वालों ने अक्सर कई इमोशंस रूह तक महसूस किए होते हैं। यहां ऐसे ही दो गाने हैं जो एक पिता ने बेटे से बिछड़कर लिखे थे और लोग रोमांटिक समझकर गाते हैं।

Tue, 9 June 2026 11:16 PMKajal Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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लव सॉन्ग समझकर गाते हैं लोग, लेकिन बेटे से बिछड़ने के गम में पिता ने लिखा था ये गाना, लिरिक्स में छिपा है दर्द

आ लौट के आजा मेरे मीत…, ये गाना सुनकर आपको भी यही लगता होगा न कि ये कोई प्रेमी-प्रेमिका के विरह का गाना है। लेकिन ऐसा नहीं है। हकीकत जानने के बाद जब आप इसके बोल ध्यान से पढ़ेंगे तो इस बात का एहसास होगा कि इसमें एक पिता का दर्द छिपा है। ये गाना रानी रूपमति का है। इसे पंडित भरत व्यास ने लिखा था। यही नहीं उनका एक और गाना अपने बेटे से बिछड़ने के बाद का है जिनमें एक पिता की पीड़ा महसूस की जा सकती है। ये कहानी कम लोग जानते हैं।

पिता की वेदना से निकला था गाना

आ लौट के आजा मेरे मीत, जरा सामने तो आओ छलिये… ये दो गाने भरत व्यास ने अपने बेटे से बिछड़ने के बाद लिखे थे। 1957 की म्यूजिकल हिट जनम जनम के फेरे का एक गाना आज तक सुना जाता है। फिल्म रिलीज के वक्त यह रेडियो पर प्रसारित होता था और लोगों ने इसे बहुत पसंद किया। गाना दिल की गहराई तक उतरता है। कम लोग जानते हैं कि गाने को बोलों में छिपी वेदना एक पिता की संवेदना से आई थी। गाना भरत व्यास ने उस वक्त लिखा था जब वह अपने बेटे के रूठकर कहीं चले जाने के दर्द से गुजर रहे थे।

नाराज होकर चला गया था बेटा

भरत व्यास का बेटा श्याम सुंदर दास बहुत लाडला था। छोटी-छोटी बातों का उस पर गहरा असर हो जाता था। एक दिन वह अपने पिता की किसी बात से नाराज हो गया। गुस्से में घर से चला गया। बेटे को बहुत खोजा गया। विज्ञापन दिए, पोस्टर लगाए। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे हर जगह प्रार्थना की। बेटा नहीं मिला। भरत व्यास इस दर्द में थे। बेटे के जाने का गम उन्हें खाए जा रहा था। वह डिप्रेशन में जाने लगे और अपराधबोध में आ गए।

ऐसे लिखा जरा सामने तो आ छलिए

बच्चे की तलाश जारी थी। हर जतन किया जा रहा था। दूसरी ओर भरत व्यास का काम से मन हट गया। वह गुमसुम रहने लगे और चिड़चिड़े हो गए। बताया जाता है कि एक दिन एक प्रोड्यूसर ने उनसे गाना लिखने की दरख्वास्त की। भरत परेशान थे उन्होंने गुस्से में ना कह दिया। उनकी पत्नी ने निर्माता से कहा कि वह उन्हें समझाएंगी। भरत की पत्नी ने उन्हें समझाया तो वह राजी हो गए। भरत व्यास ने 'जरा सामने तो आ ओ छलिए' गाना अपने बेटे की याद में लिखा। गाने को लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने गाया। उनका बेटा नहीं मिला।

बेटे की याद में आ लौट के आ जा मेरे मीत

इसके बाद रानी रूपमति के गाने आ लौट के आ जा मेरे मीत में भी भरत व्यास ने बेटे की याद में लिखा था। अब आप जब इस गाने को सुनेंगे या लिरिक्स पढ़ेंगे तो उनका कलेजा चीरने वाला दर्द साफ पता चलेगा। यह गाना बहुत पसंद किया गया। अच्छी बात यह थी इसके बाद उनका बेटा वापस आ गया।

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