इंदिरा गांधी को खटकी थी बच्चन परिवार की ये बात, राजीव गांधी की हत्या के बाद इसलिए आई दोनों फैमिली में दूरियां
अमिताभ बच्चन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव के कहने पर ही राजनीति में आए थे। हालांकि, राजनीति में उनका सिक्का ज्यादा दिनों तक नहीं चला और वो उन्होंने हमेशा-हमेशा के लिए सियासत से तौबा कर ली। बाद के दिनों में दोनों परिवारों के रिश्ते में खटास भी आई।

फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति जगत के बीच सालों से गहरा नाता रहा है। कई अभिनेता नेता बनकर राजनीति में अपनी खास जगह बनाई है। वहीं, बच्चन परिवार और इंदिरा गांधी के परिवार के बीच की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है। इनके बीच के गहरे रिश्ते सालों-साल तक रहे। एक वक्त भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और तेजी बच्चन दोनों पक्की सहेलियां थीं, लेकिन राजीव गांधी की हत्या के बाद दोनों परिवार में ऐसी दूरियां आईं थीं।
सत्ता गई तो बना ली थी दूरी
अमिताभ बच्चन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव के कहने पर ही राजनीति में आए थे। हालांकि, राजनीति में उनका सिक्का ज्यादा दिनों तक नहीं चला और वो उन्होंने हमेशा-हमेशा के लिए सियासत से तौबा कर ली। बाद के दिनों में दोनों परिवारों के रिश्ते में खटास भी आई और यह साफ-साफ दिखा भी, खासकर इमरजेंसी के बाद।
शादी से पहले डेढ महीने तब अमिताभ के घर रहीं थीं सोनिया
साल 1968 में जब सोनिया गांधी पहली बार भारत आईं थीं, तब दिल्ली एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करने खुद अमिताभ बच्चन गए थे। सोनिया गांधी करीब डेढ़ महीने बच्चन परिवार के साथ रहीं। यही नहीं तेजी बच्चन को सोनिया अपनी तीसरी मां कहने लगीं।
राजीव गांधी की हत्या के बाद बदल गया सब
धर्मयुग को दिए अपने इंटरव्यू में खुद सोनिया गांधी ने बताया था कि राजीव गांधी से शादी के पहले उनकी सास इंदिरा गांधी ने सलाह दी थी कि पहले वो बच्चन परिवार के साथ रहें ताकि वो भारत के रहन-सहन को सीख सकें। ऐसा इसलिए क्योंकि इंदिरा गांधी और तेजी बच्चन में बहुत गहरी दोस्ती थी। हालांकि, मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद बच्चन परिवार और गांधी परिवार में दूरी बढ़ने लगी।
इस वजह से आई थी गांधी और बच्चन परिवार के बीच दूरियां
मशहूर लेखक और पत्रकार रशीद किदवई लिखते हैं कि मनमुटाव तो इमरजेंसी के वक्त ही शुरू हो गई थी। इंदिरा गांधी ने जब जनता के गुस्से को शांत करने के लिए विचार किया कि बच्चन परिवार को एक जनसभा में बुलाया जाए। उस वक्त तेजी बच्चन ने साफ मना कर दिया और कहा कि इससे अमिताभ बच्चन के फिल्मी करियर पर बहुत खराब असर पड़ेगा। तेजी की ये बात इंदिरा गांधी को इतनी बुरी लगी कि इसी के बाद से ही बच्चन और गांधी परिवार में दूरियां बढ़ने लगीं।
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